
नई दिल्ली। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने भी एंजेल चकमा की हत्या की कड़ी निंदा की। उन्होंने सोमवार को भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि सत्ताधारी पार्टी ने नफरत को सामान्य बना दिया है, जिसकी वजह से ऐसी घटनाएं हो रही हैं।
उत्तराखंड के देहरादून में त्रिपुरा के छात्र एंजेल चकमा की हत्या के मामले पर कांग्रेस ने केंद्र सरकार को निशाना पर लिया। कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने उत्तराखंड की भाजपा सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि एंजेल चकमा के परिवार के सदस्यों ने कहा है कि उत्तराखंड की पुलिस शिकायत पर तेजी से काम नहीं कर रही है।
गौरव गोगोई ने कहा, ‘एफआईआर को दर्ज होने में 12 दिन लग गए। छात्रों के प्रदर्शन के बाद एफआईआर दर्ज की गई। मामले में चार लोगों की गिरफ्तारी भी हुई, लेकिन मुख्य आरोपी भाग गया।’
‘मुझसे आगरा में एक गार्ड ने मांगा पासपोर्ट’ :कांग्रेस सांसद
कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने कहा, ‘मेरे साथ भी ऐसा ही हुआ था। एक बार जब मैं आगरा गया था, तो एक गार्ड ने मुझसे पूछा, ‘आप कहां से हैं? अपना पासपोर्ट दिखाइए।’ उन्होंने कहा कि हम पूर्वोत्तर के लोगों से हमारे ही देश में, हमारे ही लोग पासपोर्ट मांगते हैं। उन्होंने कहा कि अपने देश का झंडा गर्व से फहराने के लिए बहुत साहस चाहिए और फिर अपने ही देश के किसी नागरिक से ऐसी बात सुनना, यह हमारी सहनशीलता और देशभक्ति का प्रतीक है।’
उन्होंने कहा, ‘सरकार वन इंडिया की बात करती है, लेकिन भारत में विविधताओं की बात नहीं करती है। इस ‘वन इंडिया’ में कितनी भाषाएं हैं, कितने राज्य हैं, लोगों के चेहरे कितने अलग-अलग हैं, उसकी बात नहीं करती।’ उन्होंने कहा कि ऐसे में हम उम्मीद करते हैं कि ये केस जल्दी से जल्दी अदालत में जाए और दोषियों को कड़ी सजा मिले।
‘पुलिस ने एफआईआर दर्ज करने में 12 दिन क्यों लगाए’ :गौरव गोगोई
उन्होंने कहा कि हम चाहते हैं कि जो व्यक्ति भाग गया है, उसे जल्दी पकड़ा जाए और ये जांच की जाए कि पुलिस ने एफआईआर करने में देर क्यों की? उन्होंने असम के पश्चिम कार्बी आंगलोंग जिले के दो समुदायों के बीच हुई हिंसक झड़प का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि वहां के जनजातीय लोगों के खिलाफ देश से बाहर निकलने के नारे लगाए जा रहे हैं।
वहीं, देहरादून में त्रिपुरा के छात्र की हत्या के मामले पर कांग्रेस विधायक सुदीप रॉय बर्मन ने कहा, ‘माता-पिता ने अपने प्यारे बेटे को खो दिया। अब समय आ गया है कि केंद्र सरकार नस्लीय भेदभाव के खिलाफ कानून बनाए।’



