जालौन
छात्रों के हक़ में प्रशासन की संवेदनशील पहल
गांधी इंटर कॉलेज उरई में नमामि गंगे द्वारा बनवाई जा रही टंकी का स्थान बदला

छात्र – छात्राओं के नारेबाजी के बाद डीएम का त्वरित एक्शन
नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो l
जालौन : गांधी इंटर कॉलेज स्टेशन रोड उरई में उस समय स्थिति तनावपूर्ण हो गई जब स्कूल परिसर के बाहर स्थित खेल मैदान के ठीक बीचों-बीच नमामि गंगे योजना के तहत पानी की टंकी का निर्माण कार्य शुरू कर दिया गया। खेल मैदान जो वर्षों से छात्रों की शारीरिक गतिविधियों खेलकूद और आयोजनों का प्रमुख केंद्र रहा है उसके बीच टंकी निर्माण से छात्रों अभिभावकों और स्कूल प्रबंधन में भारी नाराजगी देखने को मिली। इसी नाराजगी के चलते शुक्रवार को स्कूल के छात्र-छात्राओं ने एकजुट होकर जोरदार नारेबाजी की और टंकी निर्माण का खुलकर विरोध किया। छात्रों का कहना था कि यदि खेल मैदान ही समाप्त हो जाएगा तो उनके शारीरिक विकास खेल अभ्यास और विद्यालयीन गतिविधियों पर गंभीर असर पड़ेगा। स्कूल प्रबंधन ने भी स्पष्ट रूप से कहा कि शिक्षा के साथ-साथ खेल भी बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए आवश्यक हैं ऐसे में खेल मैदान को नुकसान पहुंचाना उचित नहीं है। जैसे ही इस पूरे मामले की जानकारी जिलाधिकारी जालौन राजेश कुमार पाण्डेय को मिली उन्होंने बिना देर किए संवेदनशीलता दिखाते हुए तत्काल आलाधिकारियों के साथ मौके पर पहुंचकर स्थिति का निरीक्षण किया। डीएम ने छात्रों स्कूल प्रशासन और संबंधित विभागीय अधिकारियों से बातचीत की और सभी पक्षों की बातों को गंभीरता से सुना। निरीक्षण और विचार-विमर्श के बाद जिलाधिकारी ने स्पष्ट निर्देश दिए कि नमामि गंगे योजना के तहत बनने वाली पानी की टंकी का स्थान बदला जाए। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को आदेशित किया कि बच्चों के खेलने की जगह को किसी भी हाल में नुकसान न पहुंचाया जाए और खेल मैदान को छोड़कर किसी साइड की उपयुक्त जगह पर ही टंकी का निर्माण किया जाए। डीएम के इस निर्णय से छात्रों और विद्यालय प्रशासन ने राहत की सांस ली और छात्र छात्राओं में खुशी की लहर दौड़ गई। इस मामले में सदर विधायक उरई गौरी शंकर वर्मा की भूमिका भी महत्वपूर्ण रही। विधायक ने एक दिन पूर्व ही संबंधित अधिकारियों से बात कर बीच मैदान में बन रही टंकी का विरोध किया था। शुक्रवार को उन्होंने जिलाधिकारी के समक्ष भी अपनी बात मजबूती से रखी और स्वयं डीएम को साथ लेकर गांधी इंटर कॉलेज पहुंचे जिससे प्रशासनिक निर्णय को गति मिली। जिलाधिकारी के त्वरित और छात्रहित में लिए गए फैसले से स्कूल प्रशासन ने उनका आभार व्यक्त किया और अभिवादन किया। यह पूरा घटनाक्रम न सिर्फ प्रशासन की संवेदनशीलता को दर्शाता है बल्कि यह भी संदेश देता है कि विकास कार्य जरूरी हैं लेकिन बच्चों के भविष्य और उनके अधिकारों से समझौता नहीं किया जा सकता।



