पशुपालन से आत्मनिर्भरता की ओर पाकुड़, स्वरोजगार की नई इबारत लिख रहा जिला
Pakur is moving from animal husbandry to self-reliance, the district is writing a new chapter in self-employment.

नेशनल प्रेस टाइम्स ब्यूरो।
पाकुड़। वन एवं पहाड़ियों से आच्छादित पाकुड़ जिला अब पशुपालन के माध्यम से स्वरोजगार और आत्मनिर्भरता की दिशा में नई पहचान बना रहा है। जहां भौगोलिक परिस्थितियों के कारण कृषि कार्य में आंशिक चुनौतियां सामने आती हैं, वहीं पशुपालन के लिए यह क्षेत्र अत्यंत अनुकूल वातावरण प्रदान करता है। परिणामस्वरूप पशुपालन गतिविधियां न केवल ग्रामीण आय का सशक्त स्रोत बन रही हैं, बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन कर पलायन रोकने में भी अहम भूमिका निभा रही हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में स्वरोजगार को बढ़ावा देने, पलायन पर अंकुश लगाने तथा राज्य को दूध, अंडा और मांस उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से राज्य सरकार द्वारा मुख्यमंत्री पशुधन विकास योजना संचालित की जा रही है। इस बहुउद्देशीय योजना के तहत गाय पालन, बकरी पालन, मुर्गी पालन (ब्रॉयलर एवं लेयर), बत्तख पालन सहित अन्य पशुपालन गतिविधियों के लिए अनुदानित दर पर पशु-पक्षी, आवश्यक उपकरण, बीमा एवं तकनीकी सहयोग उपलब्ध कराया जा रहा है। इस योजना का लाभ लेकर पाकुड़ प्रखंड के शहरकोल पंचायत अंतर्गत ग्राम आसनडिप्पा निवासी बेंजामिन किस्कु ने स्वरोजगार के रूप में सुकर (सूअर) पालन को अपनाया। पशुपालन विभाग द्वारा मुख्यमंत्री पशुधन विकास योजना के अंतर्गत सुकर विकास योजना के तहत उन्हें चार मादा एवं एक नर सुकर की लघु प्रजनन इकाई अनुदानित दर पर उपलब्ध कराई गई। साथ ही योजना के प्रावधानों के अनुसार पशुओं का बीमा एवं खाद्यान्न भी प्रदान किया गया। पिछले लगभग डेढ़ वर्षों से श्री किस्कु पशुपालन विभाग द्वारा प्रदत्त निःशुल्क प्रशिक्षण एवं उन्नत तकनीकों के माध्यम से सफलतापूर्वक सुकर पालन कर रहे हैं। प्रखंड पशुपालन पदाधिकारी डॉ. अभिषेक यादव ने उनके फार्म निरीक्षण के दौरान बताया कि अब तक बेंजामिन किस्कु द्वारा लगभग 30 व्यस्क सुकरों का उत्पादन किया जा चुका है, जिनमें से कई का सफलतापूर्वक विक्रय भी किया गया है। इस गतिविधि से उन्हें औसतन लगभग 30 हजार रुपये प्रतिमाह की आय हो रही है। किस्कु ने बताया कि पशुपालन ने उनके आर्थिक जीवन को पूरी तरह बदल दिया है और अब वे स्वयं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर महसूस करते हैं। उन्होंने जिले के अन्य युवाओं से भी पशुपालन को अपनाने और स्वरोजगार के माध्यम से आत्मनिर्भर बनने की अपील की। पाकुड़ जिले में पशुपालन की यह सफलता कहानी न केवल सरकारी योजनाओं की प्रभावशीलता को दर्शाती है, बल्कि ग्रामीण युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत बनकर उभर रही है।



