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भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर बातचीत तेज

टैरिफ के बावजूद सरकार ने दिए बड़ी डील के संकेत

नई दिल्ली । भारत और अमेरिका के बीच एक बड़े व्यापार समझौते को लेकर द्विपक्षीय बातचीत फिर शुरू हो गई है। वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल के अनुसार, ऊंचे टैरिफ की चुनौतियों के बावजूद अमेरिकी बाजार में भारतीय वस्तुओं का निर्यात बढ़ा है। ऐसे में दोनों देश एक सफल डील की कवायद में है। आइए इस बारे में विस्तार से जानें।
दुनिया में जारी व्यापारिक तनाव के बीच भारत और अमेरिका एक व्यापक व्यापार समझौते की दिशा में अपने प्रयासों को तेज कर रहे हैं। केंद्रीय वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने कहा हे कि दोनों देश सक्रिय रूप से व्यापार वार्ता कर रहे हैं और एक सकारात्मक नतीजे की उम्मीद है। सरकार की ओर से यह एलान ऐसे समय पर किया गया है जब भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में से एक के रूप में अपनी स्थिति मजबूत कर रहा है।
टैरिफ के निर्यात पर असर के बारे में क्या बोले वाणिज्य सचिव?-वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने गुरुवार को साफ किया कि अमेरिका की ओर से लगाए गए ऊंचे टैरिफ के बावजूद, अमेरिका को होने वाले भारतीय निर्यात में सकारात्मक वृद्धि हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह इजाफा भारतीय उत्पादों की वैश्विक प्रतिस्पर्धा और अमेरिकी बाजार में उनकी बढ़ती मांग के बारे में बताता है। वाणिज्य सचिव ने कहा, “दोनों पक्ष (व्यापार वार्ता में) लगे हुए हैं… और दोनों पक्षों को लगता है कि एक व्यापार समझौता संभव है।
कितना जरूरी है भारत-अमेरिका के बीच व्यापार वार्ता?-इस व्यापारिक सौदे की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पिछले महीने ही इस दिशा में उच्च स्तरीय संवाद हुआ है।
दिसंबर में केंद्रीय वाणिज्य व उद्योग मंत्री पीयूष गोयल और संयुक्त राज्य व्यापार प्रतिनिधि (यूएसटीआर) जेमिसन ग्रीर के बीच एक वर्चुअल बैठक आयोजित की गई थी।
इस बैठक का मुख्य उद्देश्य व्यापारिक बाधाओं को दूर करना और द्विपक्षीय व्यापार को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए रोडमैप तैयार करना था।
यह वार्ता केवल टैरिफ कटौती तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें बाजार पहुंच, सेवाओं का व्यापार और निवेश नियमों के सरलीकरण जैसे महत्वपूर्ण पहलू भी शामिल होने की संभावना है।
दोनों देशों के बीच व्यापार समझौते का क्या होगा असर?
भारत और अमेरिका के बीच यदि यह व्यापारिक समझौता धरातल पर उतरता है, तो इसका सीधा प्रभाव कई प्रमुख क्षेत्रों पर पड़ेगा-एमएसएमइ्र और लघु उद्योग: भारत के सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (एमसएमई) के लिए अमेरिकी बाजार के द्वार और अधिक सुगमता से खुलेंगे, जिससे निर्यात आधारित रोजगार सृजित होंगे।
तकनीक और फार्मास्युटिकल: भारत के आईटी सेवा क्षेत्र और दवा निर्यात को इस समझौते से नई मजबूती मिलने की उम्मीद है।
नीतिगत स्थिरता: एक औपचारिक समझौता व्यापारिक नियमों में स्पष्टता लाएगा, जिससे दोनों देशों के निवेशकों के बीच विश्वास बढ़ेगा।
अब आगे क्या हो सकता है?-वाणिज्य सचिव के बयान से साफ है कि भारत अब केवल घरेलू बाजार तक सीमित नहीं रहना चाहता, बल्कि अमेरिकी बाजार में मौजूद चुनौतियों को अवसर में बदलने के लिए तैयार है। हालांकि व्यापार वार्ता से जुड़ी बातचीत के विवरण आने अभी शेष हैं, लेकिन ‘दोनों पक्षों की सकारात्मक भावना’ एक बड़े आर्थिक गठजोड़ का संकेत है। आने वाले महीनों में होने वाली बैठकों में जो समझौते होंगे वे भविष्य की रुपरेखा तय करेंगे।

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