ललितपुर

सादर श्रद्धांजलि एवं नमन, कलम के अनथके योद्धा पूज्य पिताजी प्रो. भगवत नारायण शर्मा

पूज्य पिताजी तुम्हारी कलम और ओजस्वी वाणी में बल था, जीवित लोहू जागृत जल था : सिद्धार्थ शर्मा

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो।
ललितपुर। जब मेरे एक करीबी श्री रामकिशोर विश्वकर्मा शिक्षक, पूज्य पिताजी के 86 वें जन्मदिवस पर शुभकामनाएं देने के लिए घर पहुँचे तो उन्होंने कहा था-
मैं 11 वर्ष का वृद्ध हूँ। तब उन्होंने कहा कि यह पहेली मेरी समझबूझ से बाहर है? उन्होंने कहा कि शरीर रचना विज्ञानियों का यह निष्कर्ष है कि-प्रत्येक मनुष्य का शरीर अविराम रक्त संचार के होने से शरीर की प्रत्येक कोशिका 11 वर्ष में बदल जाती है इसलिये प्रत्येक व्यक्ति अपने आपको मेरी (शर्मा जी ) की तरह चिर तारुण्य माने। वस्तुत: वे 1968 से नेहरू महाविद्यालय ललितपुर की सेवा में आए और 1999 को प्राचार्य पद से सेवा अवकाश प्राप्त किया किन्तु शासन ने 4 वर्ष अपने ही स्थान पर उन्हें काम करने का अवसर दिया तदन्तर उच्च शिक्षा विभाग ने उन्हें श्री दीनदयाल उपाध्याय राजकीय डिग्री कॉलेज महरौनी में पुन: 4 वर्ष के लिए अपने यहाँ नियुक्ति दी। लगभग आधी शताब्दी से अधिक क्लासरूम की शिक्षा से मुक्त होकर एक सच्चे और अच्छे शिक्षक के रूप में समाज को जगाते रहने में प्रतिक्षण सक्रिय रहते थे। जब मैं बड़े सबेरे अखबार हाथ में उठाता हूँ तो सबसे पहले अन्य पाठकों की तरह ललितपुर का पृष्ठ खोलता हूँ और उत्सुकता के साथ पहले यह देखता हूँ कि पूज्य पिताजीका कोई प्रेरणादायी विचार की अभिव्यक्ति मेरे तन मन को प्रफुल्लित कर दे। कोरोनाकाल में भी वो श्रीमद्भागवत महापुराण के प्रेम के अमृत में डुबकी लगवाते रहे तथा गीता के 18 अध्यायों में से प्रत्येक के महत्वपूर्ण श्लोकों का तात्पर्यार्थ भी गहराई में डूबकर हम सभी को देते रहे। वर्ष 1961 में जब वे डी .ए. बी.कॉलेज कानपुर में थे तब उन्हें वहाँ के तत्कालीन प्राचार्य ने  इलाहाबाद के केंद्रीय शिक्षा संस्थान जो विश्वविद्यालय से सम्बद्ध है वहां आयोजित अखिल भारतीय विश्वविद्यालयों एवं डिग्री कॉलेजों की वाद विवाद प्रतियोगिता जो महान साहित्यकार महादेवी वर्मा की अध्यक्षता में संपन्न हुई थी उसमें पूज्य पिताजी को सर्वोत्तम पुरस्कार से विभूषित किया गया था। उनके द्वारा 1962 में चीनी हमले के दौरान रचित नाटक सिंदूर और बारूद ने स्थानीय संस्थाओं और हिंदी क्षेत्र के अधिकांश कालेजों में मंचस्थ किए जाने पर भारी धूम मचा दी थी। नेहरू महाविद्यालय में वे पूरे सेवा काल तक छात्र संघ के संरक्षक और निर्वाचन अधिकारी लगातार रहे और छात्र प्रत्याशियों द्वारा पूरे कालेज के विद्यार्थियों के समक्ष उन्होंने प्रत्याशियों की भाषण  कराने की परंपरा का सूत्रपात किया था। छात्र संघ  के पक्ष- विपक्ष के सभी प्रत्याशी उनकी निष्पक्षता एवं ईमानदारी से निश्चिंत होकर सदैव शांतिपूर्ण मतदान को सुचारूपता के साथ संपन्न कराते थे और युवा शक्ति को वे हर दम सही दिशा देते थे। उनके कार्यकाल में हॉकी के जादूगर मेजर ध्यानचंद, तत्कालीन राज्यपाल बी गोपाल रेड्डी, एकांकी सम्राट डा.रामकुमार वर्मा, प्रख्यात व्यंग्यकार हरिशंकर परसाई, कथाकार विष्णु प्रभाकर जैसी विभूतियों ने नेहरू महाविद्यालय में आकर शोभा बढ़ाई और भी ऐसे अनेकानेक प्रसंग व सद्कार्य रहे हैं जो प्रेरणा और ऊर्जा से लबरेज थे। हमने आपके पुरुषार्थी जीवन से बहुत कुछ सीखा है। आप हम सबके मार्गदर्शक और प्रेरणापुंज रहे। साहित्यिक कलम के अनथके योद्धा, सादगीपूर्ण जीवन जीने वाले ललितपुर के एक महत्वपूर्ण स्तम्भ, नेहरू महाविद्यालय के सेवानिवृत्त प्राचार्य प्रो. भगवत नारायण शर्मा की आत्मा परमात्मा में लीन हो गयी है। परमपिता परमात्मा से प्रार्थना है कि हमारे परिवार पर हुए इस वज्रपात को सहन करने की शक्ति प्रदान करें। हम सभी परिवार जन उनके बताए हुए मार्ग पर चलते रहेगें। उनकी पावन स्मृति में शत-शत नमन।
पंचतत्व में विलीन हुये नेमवि के पूर्व प्राचार्य प्रो.भगवत नारायण शर्मा
जिले के प्रख्यात साहित्यकार, लेखक और अपनी जीवन्त लेखनी से प्रत्येक महापुरुष की जयन्ती, त्यौहारों व राष्ट्रीय पर्वों पर लेख प्रस्तुत कर लोगों को रोमांचक किस्से बताने वाले नेहरू महाविद्यालय के पूर्व प्राचार्य प्रो.भगवत नारायण शर्मा का शनिवार देर रात निधन हो गया। उनके निधन की खबर सुनकर शहर में शोक लहर दौड़ गयी। बताते चलें कि प्रो.भगवत नारायण शर्मा अपने हंसमुख स्वभाव, हिन्दी साहित्य में असाधारण ज्ञान को लेकर काफी प्रख्यात थे। उनके लिखे हुये लेख लोगों में काफी प्रेरणादायी रहे। मनोज शर्मा और सिद्धार्थ शर्मा के पूज्यनीय पिता प्रो.भगवत नारायण शर्मा के आकस्मिक निधन से शहर में शोक का माहौल बना हुआ है। रविवार को उनकी अंतिम यात्रा उनके निज निवास स्थान रिशाला मंदिर के पास से निकाली गयी, जो कि इलाइट चौराहा स्थित मुक्तिधाम पर पहुंची, जहां उन्हें पंचतत्व में विलीन किया गया।
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