कानपुर

कानपुर चार्टर्ड अकाउंटेंट्स सोसायटी द्वारा “आयकर अधिनियम 2025” पर एक भव्य

सुव्यवस्थित एवं ज्ञानवर्धक संगोष्ठी का आयोजन किया गया

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो।
कानपुर : कानपुर चार्टर्ड अकाउंटेंट्स सोसायटी द्वारा गैजेस क्लब के रूबी हॉल में “आयकर अधिनियम 2025” पर एक भव्य,सुव्यवस्थित एवं ज्ञानवर्धक संगोष्ठी का आयोजन किया गया। वही कार्यक्रम की अध्यक्षता सीए जे.पी.एस. भाटिया,पूर्व अध्यक्ष,किटबा द्वारा की गई। मुख्य वक्ता के रूप में सीए राजीव मेहरोत्रा, चेयरमैन,डायरेक्ट टैक्स कमेटी, केसीएएस (2025-26) ने पर गहन,व्यावहारिक एवं तकनीकी विमर्श प्रस्तुत किया। कार्यक्रम के प्रारंभ में केसीएएस के अध्यक्ष सीए अखिलेश तिवारी ने अपने स्वागत संबोधन में आयकर अधिनियम,2025 को भारत की प्रत्यक्ष कर व्यवस्था में एक महत्वपूर्ण परिवर्तन बताते हुए कहा कि नया आयकर अधिनियम,2025, जिसमें 23 अध्याय,536 धाराएँ तथा 16 अनुसूचियाँ सम्मिलित हैं,केवल पुराने कानून का स्थानापन्न नहीं है,बल्कि सरलीकरण,निश्चितता एवं प्रौद्योगिकी-आधारित अनुपालन की दिशा में एक ठोस प्रयास है। उन्होंने यह भी कहा कि चार्टर्ड अकाउंटेंट्स के लिए नए अधिनियम के शब्द एवं उसकी भावना—दोनों को समझना एक पेशेवर दायित्व है,जिससे करदाताओं एवं व्यवस्था को सही दिशा में मार्गदर्शन दिया जा सके। सीए राजीव मेहरोत्रा ने अपने विस्तृत संबोधन में कहा कि आयकर अधिनियम, 2025 के अधिनियमन को भारत की प्रत्यक्ष कर प्रणाली के सरलीकरण,युक्तिकरण तथा आधुनिकीकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में व्यापक रूप से प्रत्याशित किया गया था। भाषा के सरलीकरण का घोषित उद्देश्य स्पष्ट रूप से परिलक्षित होता है,तथापि कई मौलिक एवं संरचनात्मक चिंताएँ अब भी ध्यान देने योग्य बनी हुई हैं। प्रथम यह अधिनियम लंबित कर वादों की अत्यधिक संख्या को कम करने हेतु विधि के किसी सार्थक सरलीकरण अथवा युक्तिकरण का प्रयास नहीं करता है। विभिन्न अपीलीय मंचों पर वर्तमान में छह लाख से अधिक मामले लंबित हैं,ऐसे में विवादों को कम करने हेतु लक्षित विधायी उपायों का अभाव एक महत्वपूर्ण अवसर की चूक को दर्शाता है। द्वितीय कम-से-कम आगामी छह वर्षों तक आयकर अधिनियम,1961 एवं आयकर अधिनियम,2025 का समानांतर रूप से लागू रहना,करदाताओं तथा कर पेशेवरों दोनों के लिए अनुपालन का बोझ एवं व्याख्यात्मक जटिलताएँ बढ़ाने की संभावना रखता है। यह द्वैध व्यवस्था सरलीकरण के स्थान पर जटिलता को बढ़ाने वाली सिद्ध होगी। तृतीय यद्यपि नए अधिनियम में बहुत कम मौलिक परिवर्तन किए गए हैं,तथापि इनमें से कुछ परिवर्तनों के दूरगामी प्रभाव हैं। कुछ मामलों में,जो प्रावधान पूर्व में व्यवहार में स्थापित थे,उन्हें स्पष्ट विधायी उद्देश्य के अभाव में परिवर्तित किया गया प्रतीत होता है। ऐसा ही एक उदाहरण अवशोषित न हो सकी अवमूल्यन से संबंधित है,जिसे न तो उसी वर्ष की अन्य किसी आय के विरुद्ध और न ही आगामी वर्षों में समायोजित किए जाने की अनुमति होगी। यह परिवर्तन विशेष रूप से पूंजी-प्रधान व्यवसायों में अवमूल्यन के कारण उत्पन्न हानियों वाले करदाताओं पर महत्वपूर्ण प्रभाव डाल सकता है। इसके अतिरिक्त यद्यपि भाषा के सरलीकरण को एक प्रमुख उद्देश्य के रूप में प्रस्तुत किया गया था,किन्तु अनेक प्रावधानों की पुनर्लेखन प्रक्रिया के कारण कुछ धाराओं के आशय अथवा परिधि में परिवर्तन हो गया प्रतीत होता है। इस प्रकार के अनपेक्षित परिणाम नई अस्पष्टताओं एवं संभावित विवादों को जन्म दे सकते हैं। समग्र रूप से,आयकर अधिनियम,2025 न तो कर विधि के मौलिक पक्षों में और न ही प्रक्रिया संबंधी तंत्र में कोई ठोस परिवर्तन प्रस्तुत करता है,बल्कि यह मुख्यत आयकर अधिनियम,1961 की विद्यमान संरचना को पुनर्गठित एवं पुनर्परिभाषित स्वरूप में प्रतिबिंबित करता है। यह आशा की जाती है कि आयकर अधिनियम,2025 के अंतर्गत प्रस्तावित किए जाने वाले नियम प्रक्रिया संबंधी जटिलताओं को दूर करेंगे,व्याख्यात्मक मुद्दों पर स्पष्टता प्रदान करेंगे तथा अनुपालन के बोझ को कम करेंगे। हितधारक एक परामर्शात्मक एवं व्यवहारिक नियम-निर्माण प्रक्रिया की अपेक्षा करते हैं,जिससे सरलीकरण,निश्चितता एवं अनुपालन की सुगमता के अभिप्रेत उद्देश्यों की अंततः प्राप्ति सुनिश्चित हो सके। आयकर अधिनियम,2025 की संरचना,प्रमुख विशेषताओं,प्रावधानों के पुनर्गठन,भाषा के सरलीकरण तथा फेसलेस प्रक्रियाओं,समयबद्ध आकलन, जोखिम-आधारित जांच एवं डेटा एनालिटिक्स की बढ़ती भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि नई कर व्यवस्था में तकनीक एवं सूचना-आधारित अनुपालन के कारण चार्टर्ड अकाउंटेंट की भूमिका अब केवल अनुपालन तक सीमित न रहकर,रणनीतिक कर सलाहकार एवं जोखिम प्रबंधक के रूप में और अधिक महत्वपूर्ण हो गई है। उनके व्यावहारिक उदाहरणों एवं स्पष्ट विश्लेषण को उपस्थित सदस्यों द्वारा अत्यंत सराहा गया। सत्र अध्यक्ष सीए जे.पी.एस. भाटिया ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि नए आयकर अधिनियम को समझने,उसकी व्याख्या करने तथा प्रभावी अनुपालन सुनिश्चित करने में इस प्रकार की संगोष्ठियाँ पेशेवर समुदाय के लिए अत्यंत उपयोगी सिद्ध होती हैं। कार्यक्रम का संचालन केसीएएस के सचिव सीए नितिन ओमर द्वारा किया गया। वही उपाध्यक्ष सीए विनीत रूंगटा ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया। सेमिनार में कानपुर एवं आसपास के अनेक वरिष्ठ एवं युवा चार्टर्ड अकाउंटेंट्स ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। कार्यक्रम का समापन हाई टी एवं नेटवर्किंग सत्र के साथ हुआ।
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