बागपत

हलालपुर में बाबा मोहन राम मंदिर पर भव्य सत्संग

हजारों श्रद्धालुओं ने लिया धर्म लाभ

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो।
हलालपुर/बागपत : हलालपुर स्थित बाबा मोहन राम मंदिर में भव्य सत्संग का आयोजन किया गया, जिसमें दूर-दराज़ से आए हजारों श्रद्धालुओं ने सहभागिता कर धर्म लाभ अर्जित किया। मंदिर परिसर श्रद्धा, भक्ति और जयघोषों से गूंज उठा तथा वातावरण पूरी तरह भक्तिमय बना रहा।
सत्संग को संबोधित करते हुए गुरुजी ने अपने प्रेरक वक्तव्य में कहा—
“सच्चा धर्म वही है जो मन को शुद्ध करे, विचारों को ऊँचा उठाए और मानव को मानव से जोड़े। सेवा, संयम और सद्भाव ही ईश्वर तक पहुँचने का सरल मार्ग हैं। जब मन में करुणा और आचरण में सत्य होता है, तभी जीवन सार्थक बनता है।”
गुरुजी के विचारों ने उपस्थित श्रद्धालुओं के हृदय को गहराई से स्पर्श किया।
कार्यक्रम के दौरान भारती कला रंग मंच सेवा संस्थान द्वारा समाज सेवा, आध्यात्मिक चेतना और सांस्कृतिक उत्थान में उल्लेखनीय योगदान के लिए गुरु तेजवीर खोखर को “राजीर्षि” की उपाधि प्रदान कर सम्मानित किया गया। इस सम्मान समारोह पर उपस्थित जनसमूह ने तालियों और जयघोष के साथ सम्मान का अभिनंदन किया।
इस अवसर पर भारती कला रंग मंच सेवा संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुरेंद्र मलानिया ने अपने वक्तव्य में कहा—
“भारतीय संस्कृति की आत्मा सेवा, संस्कार और साधना में निहित है। कला और संस्कृति केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि समाज को जोड़ने और सही दिशा देने की शक्ति हैं। हमारे संस्थान का उद्देश्य आध्यात्मिक चेतना, सांस्कृतिक मूल्यों और सामाजिक सेवा को एक सूत्र में पिरोकर जन-जन तक पहुँचाना है।”
उन्होंने आगे कहा—
“गुरु तेजवीर खोखर जैसे संतस्वरूप व्यक्तित्व समाज के लिए पथप्रदर्शक हैं। उन्हें ‘राजीर्षि’ की उपाधि देना केवल एक सम्मान नहीं, बल्कि उन मूल्यों का सम्मान है जिन पर समाज आगे बढ़ता है। आज के भौतिक युग में ऐसे सत्संग और सांस्कृतिक आयोजन समाज को मानसिक शांति और आध्यात्मिक बल प्रदान करते हैं।”
भजन गायकों ने भावपूर्ण भजनों से ऐसा समा बांधा कि श्रद्धालु भाव-विभोर होकर झूम उठे। मंदिर परिसर बार-बार “जय जयकार” के नारों से गूंजता रहा। भजन गायकों की सराहना करते हुए सुरेंद्र मलानिया ने कहा कि “जब कला भक्ति से जुड़ती है, तब वह साधना बन जाती है।”
कार्यक्रम का समापन शांति पाठ एवं प्रसाद वितरण के साथ हुआ। आयोजन ने यह संदेश दिया कि आध्यात्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रम न केवल धार्मिक चेतना को जाग्रत करते हैं, बल्कि समाज में एकता, सद्भाव और सकारात्मक ऊर्जा का संचार भी करते हैं।
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