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बहुत हो चुका, अब दुनिया देखेगी पीएम कूटनीति

40 से 50 देशों के राष्ट्राध्यक्ष अगले हफ्ते आ रहे हैं दिल्ली

नई दिल्ली : भारतीय विदेश मंत्रालय के अनुसार 21 फरवरी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति लुला के बीच द्विपक्षीय बैठक होगी जिसमें व्यापार, ऊर्जा, कृषि, जलवायु परिवर्तन, रक्षा सहयोग और नई तकनीक जैसे कई विषयों पर चर्चा की उम्मीद है।
भारत की कूटनीतिक सक्रियता एक बार फिर तेज गति से आगे बढ़ती दिख रही है। भारतीय विदेश मंत्रालय ने घोषणा की है कि ब्राजील के राष्ट्रपति लुइज इनासियो लुला दा सिल्वा 18 से 22 फरवरी 2026 तक भारत की राजकीय यात्रा पर आएंगे। यह यात्रा ऐसे समय हो रही है जब भारत वैश्विक मंच पर अपनी भूमिका को और मजबूत करने में जुटा है और उभरती तकनीक, व्यापार, सुरक्षा और बहुपक्षीय सहयोग पर जोर दे रहा है। हम आपको बता दें कि इस यात्रा का एक प्रमुख आकर्षण नई दिल्ली में होने वाला एआई इम्पैक्ट समिट होगा, जिसमें ब्राजील के राष्ट्रपति 19 और 20 फरवरी को भाग लेंगे।
विदेश मंत्रालय के अनुसार 21 फरवरी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति लुला के बीच द्विपक्षीय बैठक होगी जिसमें व्यापार, ऊर्जा, कृषि, जलवायु परिवर्तन, रक्षा सहयोग और नई तकनीक जैसे कई विषयों पर चर्चा की उम्मीद है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से भी ब्राजील के राष्ट्रपति की मुलाकात होगी। राष्ट्रपति भवन में ब्राजील के राष्ट्रपति के सम्मान में भोज का आयोजन भी होगा। उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन और विदेश मंत्री एस जयशंकर भी उनसे मुलाकात करेंगे। माना जा रहा है कि इस यात्रा से भारत और ब्राजील के बीच रणनीतिक साझेदारी को नया बल मिलेगा और ग्लोबल साउथ से जुड़े मुद्दों पर साझा पहल आगे बढ़ेगी।
इसके अलावा, फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों भी 17 से 19 फरवरी तक भारत की यात्रा पर रहेंगे। दोनों देश वर्ष 2047 तक के रोडमैप के तहत सहयोग को गहरा करने पर काम कर रहे हैं। रक्षा, अंतरिक्ष, समुद्री सुरक्षा, स्वच्छ ऊर्जा और इंडो पैसिफिक क्षेत्र में साझेदारी पर विशेष ध्यान रहेगा। मुंबई में भारत फ्रांस नवाचार वर्ष का संयुक्त शुभारंभ भी दोनों नेता करेंगे, जो साल भर मनाया जाएगा। 19 फरवरी को राष्ट्रपति मैक्रों भी एआई इम्पैक्ट समिट में शामिल होंगे। हम आपको बता दें कि इस समिट में दुनिया के 40 से 50 देशों के नेता, नीति निमार्ता और तकनीक विशेषज्ञ भाग ले सकते हैं। इससे भारत को कृत्रिम बुद्धिमत्ता के क्षेत्र में नीति निर्माण और नैतिक उपयोग पर वैश्विक संवाद का केंद्र बनने का अवसर मिलेगा।
इन कूटनीतिक गतिविधियों के बीच रक्षा क्षेत्र से भी एक अहम खबर आई है। रक्षा अधिग्रहण परिषद ने वायु सेना के लिए 114 राफेल लड़ाकू विमान खरीदने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है। यह सौदा सरकार से सरकार के बीच समझौते के जरिये आगे बढ़ेगा। योजना है कि 114 में से 90 विमान भारत में ही बनाए जाएं और इनमें करीब आधा हिस्सा स्वदेशी सामग्री का हो। भारत को इन विमानों में अपने हथियार और प्रणालियां जोड़ने का अधिकार भी होगा। वायु सेना पहले से 36 राफेल का उपयोग कर रही है, जबकि नौसेना आने वाले वर्षों में 26 राफेल एम शामिल करेगी। नए विमानों से वायु सेना की दस्ता शक्ति में कमी की समस्या कुछ हद तक दूर होगी, क्योंकि स्वीकृत संख्या 42 के मुकाबले अभी स्कवॉड्रन संख्या काफी कम है।
दूसरी ओर, विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने साप्ताहिक वार्ता में कई अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर भारत का पक्ष रखा। भारत और अमेरिका के बीच अंतरिम व्यापार समझौते के ढांचे पर उन्होंने कहा कि हाल के संशोधन दोनों पक्षों की साझा समझ को ही दिखाते हैं और अब इस ढांचे को लागू करने तथा समझौते को अंतिम रूप देने पर काम होगा। संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट में लाल किला के पास हुए विस्फोट में जैश-ए-मोहम्मद की भूमिका के उल्लेख पर उन्होंने कहा कि रिपोर्ट में भारत की चिंताओं और सीमा पार आतंकवाद के खिलाफ सख्त रुख को स्थान दिया गया है।
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से जुड़ी एक कथित वीडियो टिप्पणी पर उन्होंने कहा कि यदि ऐसा कोई वीडियो है तो उसकी सच्चाई देख कर उचित कदम उठाया जाएगा। चीन के साथ बातचीत पर उन्होंने बताया कि ब्रिक्स बैठक के दौरान दोनों पक्षों में सीमा पर शांति और स्थिरता सहित कई विषयों पर चर्चा हुई और चीन ने सुरक्षा परिषद में भारत की दावेदारी को समझने और सम्मान देने की बात कही।
पश्चिम एशिया में शांति प्रयासों से जुड़े अमेरिका के बोर्ड आॅफ पीस के निमंत्रण पर भारत ने कहा कि प्रस्ताव का अध्ययन किया जा रहा है और भारत लंबे समय से शांति, स्थिरता और संवाद का समर्थक रहा है। ईरान में रोके गए भारतीय नाविकों के मामले में आठ लोगों की रिहाई और उनकी वापसी की जानकारी दी गई, जबकि बाकी लोगों के लिए संपर्क जारी है। कनाडा के साथ सुरक्षा सहयोग, बांग्लादेश के चुनाव और रूस के साथ व्यापार व रक्षा संबंधों पर भी उन्होंने कहा कि भारत संतुलित और व्यावहारिक नीति के साथ आगे बढ़ रहा है।
बहरहाल, फरवरी का यह माह भारत की सक्रिय कूटनीति, तकनीकी नेतृत्व की आकांक्षा और रक्षा तैयारी के मेल का संकेत देता है। एआई समिट, उच्च स्तरीय यात्राएं और बड़े रक्षा फैसले मिलकर यह संदेश देते हैं कि भारत बदलती विश्व व्यवस्था में अपनी भूमिका को और मजबूत करने की दिशा में तेजी से कदम बढ़ा रहा है।

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