
नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो।
हज़ारीबाग़ चुरचू प्रखंड आंगो पंचायत के गोंदवार टोला भुइयां टोली में जंगली हाथियों के हमले से 6 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई। यह घटना बीते 12 फरवरी की देर रात लगभग 12 बजे से 2 बजे के बीच हुई, जब पांच जंगली हाथियों का झुंड गांव में घुस आया और सो रहे ग्रामीणों को कुचल दिया। इस हृदयविदारक घटना के बाद पूरे इलाके में दहशत का माहौल है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, हाथियों का झुंड अचानक गांव में पहुंचा और कई कच्चे मकानों को क्षतिग्रस्त करते हुए लोगों पर हमला कर दिया। ग्रामीणों को संभलने का मौका तक नहीं मिला। घटना में पांच लोगों की मौत मौके पर ही हो गई, जबकि एक गंभीर रूप से घायल व्यक्ति ने सदर अस्पताल में इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। मृतकों की पहचान सुमन कुमारी (31 वर्ष), पति बसंत कुमार; सबिता कुमारी (22 वर्ष), पति दीपक कुमार; संजना कुमारी (4 वर्ष), पिता दीपक कुमार; अनुराग कुमार (8 माह), पिता दीपक कुमार; धनेश्वर राम (44 वर्ष), पिता लालो राम; तथा सूरज राम (50 वर्ष), पिता बुधन राम के रूप में की गई है। एक ही परिवार के चार सदस्यों की मौत से गांव में मातम पसरा हुआ है। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। ग्रामीणों के अनुसार, क्षेत्र में पिछले कुछ दिनों से जंगली हाथियों की गतिविधियां देखी जा रही थीं। इसके बावजूद वन विभाग की ओर से पर्याप्त सतर्कता या सुरक्षा व्यवस्था नहीं की गई। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते ठोस कदम उठाए गए होते तो इतनी बड़ी घटना टाली जा सकती थी। घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय प्रशासन और वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची। शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया। प्रशासन द्वारा पीड़ित परिवारों को सरकारी मुआवजा देने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। अधिकारियों ने आश्वासन दिया है कि प्रभावित परिवारों को नियमानुसार सहायता प्रदान की जाएगी। इधर, घटना के बाद पूरे गांव में दहशत का माहौल है। लोग रातभर जागकर पहरा देने को मजबूर हैं। ग्रामीणों ने वन विभाग से मांग की है कि हाथियों के झुंड को जल्द से जल्द आबादी वाले क्षेत्र से दूर खदेड़ा जाए और स्थायी समाधान निकाला जाए। उनका कहना है कि हर वर्ष हाथियों के हमले में जान-माल की हानि होती है, लेकिन ठोस योजना के अभाव में समस्या जस की तस बनी हुई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि जंगलों में भोजन की कमी और प्राकृतिक आवास के सिकुड़ने के कारण जंगली हाथी आबादी वाले क्षेत्रों की ओर रुख कर रहे हैं। इससे मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाएं बढ़ रही हैं। आवश्यकता है कि वन विभाग और प्रशासन मिलकर दीर्घकालिक रणनीति तैयार करें, ताकि भविष्य में इस तरह की दुखद घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
फिलहाल गोंदवार टोला भुइयां टोली में शोक और भय का माहौल है। पूरा गांव इस दर्दनाक हादसे से स्तब्ध है और प्रशासन से ठोस कार्रवाई की उम्मीद लगाए बैठा है।



