चना की फसल का लिया जायजा

भुसावर l कृषि महाविद्यालय भुसावर के डीन डॉ उदय भान सिंह ने भुसावर क्षेत्र के गांव सैंधली व बंध का नगला गावों का दौरा कर चना फसल का जायजा लिया। डॉ उदय भान सिंह ने बताया कि चना में फली छेदक कीट व उखट़ा रोग का प्रकोप है। फली छेदक कीट की गिडार चने की फली में घुसकर दाने को खा जाती है। इसके नियंत्रण के लिए गर्मी की गहरी जुताई करें, खेत की मेड़ पर तार लगाकर पक्षियों के बैठने की जगह बना लें, पक्षी फली छेदक कीट को खा जाते है। खेत में 12 फेरोमेन टेªप प्रति हेक्टर लगाना भी लाभदायक है। एनपीवी 200 से 250 लार्वा का छिड़काव फली छेदक को नियंत्रित करता है। रात के समय प्रकाश पाश का प्रयोग करें। यह सभी जैविक उपाय हैं। यदि एक पौधे पर दो से अधिक गिडार पायी जाये तो फ्लूवेण्डीयामाइड 480 एससी 100 मिली प्रति हेक्टर की दर से छिडकाव करे, यह छिडकाव 50 प्रतिशत फली आने की अवस्था पर करें। चने के उखट़ा रोग के नियंत्रण के लिए फसल चक्र अपनाये तथा थायरम दवा से 2 ग्राम प्रति किग्रा की दर से उपचारित कर बीज की बुवाई करें। खेत में बुवाई पूर्व 5 किग्रा प्रति किग्रा ट्राईकोडरमा मिलाना भी रोग को नियंत्रित करता है। कीट एवं रोगों के प्रकोप से फसल में 15 से 20 प्रतिशत तक नुकसान हो सकता है । अवलोकन टीम में डॉ शंकर लाल यादव व डॉ राहुल कुमार शामिल रहे।


