गाजियाबाद
लोनी की सियासत में बढ़ी तल्खी
विधायक नंदकिशोर गुर्जर का तीखा हमला, 300 करोड़ और आपराधिक मामलों का फिर किया जिक्र
नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो।
लोनी गाजियाबाद : लोनी की राजनीति इन दिनों बयानबाज़ी और आरोप–प्रत्यारोप के दौर से गुजर रही है। भाजपा विधायक नंदकिशोर गुर्जर ने अपने जन्मदिन के अवसर पर बोलते हुए लोनी में आयोजित होली मिलन समारोह के संदर्भ में कुछ नेताओं पर खुलकर अपना निशाना साधा। उन्होंने बिना नाम लिए कहा कि कुछ लोग “मुखौटा लगाकर” कार्यक्रमों में पहुंचते हैं और अनर्गल बयान देकर लोनी की छवि खराब करने का प्रयास कर रहे हैं। विधायक ने कहा कि उन्होंने अपने होली मिलन समारोह में किसी के खिलाफ कुछ नहीं कहा, लेकिन अन्य कार्यक्रमों में उनके खिलाफ और लोनी को लेकर की जा रही टिप्पणियां दुर्भाग्यपूर्ण हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोगों ने लोनी को “नरक बनाने का काम किया” है और अब वही लोग नैतिकता की बातें कर रहे हैं।
“आरोप सिद्ध हो जाए तो छोड़ दूंगा राजनीति”
अपने संबोधन में नंदकिशोर गुर्जर ने चुनौती देते हुए कहा कि यदि उन पर लगाए गए किसी भी आरोप को सिद्ध कर दिया जाए तो वे राजनीति छोड़ देंगे। उन्होंने कहा कि लोनी की राजनीति में बेदाग छवि और साफ नीयत के लोगों को आगे आना चाहिए।
विधायक ने यह भी चेतावनी दी कि यदि जरूरत पड़ी तो वे खुलेआम उन लोगों के कारनामों को उजागर करेंगे जो पर्दे के पीछे से राजनीति कर रहे हैं। अपने भाषण में उन्होंने 300 करोड़ रुपये से जुड़े एक मामले और एक आपराधिक घटना का भी जिक्र दोहराया, जिससे सियासी माहौल और गरमा गया।
चेयरमैन के होली मिलन कार्यक्रम में भी उठे सवाल
इससे पहले नगरपालिका परिषद लोनी की चेयरमैन रंजीता धामा द्वारा आयोजित एक होली मिलन कार्यक्रम में भाजपा और राष्ट्रीय लोकदल के कई स्थानीय नेता शामिल हुए थे। उस कार्यक्रम में भी लोनी के एक तथाकथित नेता पर लोनी के भाईचारे के माहौल को बिगाड़ने और क्षेत्र के बारे में अनर्गल बातें करने का आरोप लगाया गया था। मंच से जनता से एकजुट होकर ऐसे बयानों का विरोध करने की अपील की गई थी। विकास पर राह पर पड़ेगा असर लोनी क्षेत्र में सक्रिय नेताओं के बीच लगातार बढ़ती बयानबाज़ी से स्थानीय राजनीति में खींचतान के संकेत साफ नजर आ रहे है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि भले ही 2027 का विधानसभा चुनाव अभी दूर हो, लेकिन संभावित दावेदारों की सक्रियता अब क्षेत्र में बढ़ने लगी है। इसी कारण मंचों से शब्दों ही शब्दों में एक-दूसरे पर अप्रत्यक्ष रूप से हमले तेज हो गए हैं। वहीं स्थानीय निवासियों के बीच यह चिंता भी उभर रही है कि जनप्रतिनिधियों के बीच चल रहा यह टकराव विकास कार्यों में बाधा न बन जाए। कई लोगों का कहना है कि लोनी की जनता अब आपसी संघर्ष से ऊब चुकी है और क्षेत्र में सड़क, पानी, सफाई, शिक्षा और सुरक्षा जैसे बुनियादी मुद्दों पर ठोस काम चाहती है।
आगे क्या?
फिलहाल लोनी की सियासत शब्दों की जंग में उलझी दिखाई दे रही है। आने वाले दिनों में यह देखना होगा कि आरोप–प्रत्यारोप का यह दौर किस दिशा में जाता है जनता की निगाहें अब राजनीतिक बयानबाज़ी से आगे इसके परिणामों पर टिकी हैं।


