बेतुल
बैतूल रघुकुल की रीति निभाने राम चले वनवास, भावुक हुआ भैंसदेही का रामलीला मंच
दशरथ के वचन और राम के त्याग का मार्मिक मंचन देखने उमड़े हजारों दर्शक

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो
भैंसदेही। पिता के वचन की मर्यादा निभाने के लिए भगवान श्रीराम का राजमहल छोड़कर वन जाने का प्रसंग भैंसदेही में आयोजित रामलीला के तीसरे दिन साकार हुआ। कैकेयी के दो वरदान, राजा दशरथ की विवशता, माता कौशल्या की भावुक विदाई और सीता-लक्ष्मण के साथ राम के वनगमन ने दर्शकों को भावुक कर दिया। नवयुवक दुर्गा रामलीला मंडल के मंचन को देखने नगर सहित आसपास के क्षेत्रों से हजारों की संख्या में दर्शक पहुंचे।
मंचन की शुरुआत भगवान गणेश की आरती के साथ हुई। इसके बाद राजा दशरथ ने अपने दरबार में भगवान श्रीराम के राज्याभिषेक की घोषणा की और पूरे नगर में इसकी मुनादी करवा दी। इसी बीच मंथरा-कैकेयी प्रसंग में कैकेयी की दासी मंथरा ने उन्हें बताया कि महाराज दशरथ बड़े पुत्र राम को राजगद्दी सौंपना चाहते हैं। उसने कैकेयी को यह कहकर उकसाया कि भरत राम के अधीन हो जाएंगे और बाद में कैकेयी की भी अवहेलना होगी। मंथरा की बातें सुनकर कैकेयी पश्चाताप करने लगीं। इसके बाद मंथरा ने उन्हें राजा दशरथ से पहले मिले वरदानों की याद दिलाते हुए भरत के लिए राजगद्दी और राम के लिए 14 वर्ष का वनवास मांगने की सलाह दी।
इसके बाद दशरथ-कैकेयी संवाद का मंचन हुआ। राजा दशरथ कोप भवन में कैकेयी को समझाने पहुंचे और उन्हें भरोसा दिलाने का प्रयास किया कि राम के राज्याभिषेक से उन्हें कोई परेशानी नहीं होगी। लेकिन कैकेयी अपनी मांग पर अड़ी रहीं। आखिरकार राजा दशरथ को विवश होकर भरत को राजगद्दी देने और राम को 14 वर्ष का वनवास देने का वचन देना पड़ा।
अगले दृश्य में राम-कौशल्या संवाद ने दर्शकों को भावुक कर दिया। भगवान श्रीराम ने माता कौशल्या से वन जाने की आज्ञा मांगी। माता कौशल्या उन्हें वनवास भेजना नहीं चाहती थीं, लेकिन पति के वचन की मर्यादा को ध्यान में रखते हुए उन्होंने राम को वन जाने की अनुमति दी और पिता के वचन का मान रखने की बात कही।
इसके बाद राम वनगमन लीला का मंचन हुआ। भगवान श्रीराम ने माता सीता से वन जाने की बात कहते हुए उनसे सभी का ध्यान रखने को कहा। इस पर सीता ने स्पष्ट किया कि पत्नी का स्थान पति के साथ होता है, राजमहल में नहीं। उन्होंने राम के साथ वन जाने का निर्णय लिया। लक्ष्मण ने भी राम से आग्रह किया कि वे उन्हें सेवा के लिए साथ ले चलें। राम के बहुत समझाने के बाद भी लक्ष्मण नहीं माने और सीता के साथ राम के वनगमन में सहभागी बने। तीनों को वन जाते देख अयोध्या की प्रजा दुखी हो गई और उनके साथ चलने की प्रार्थना करने लगी। राम के समझाने पर प्रजा कुछ दूर तक उनके साथ चली।
रामलीला में राजा दशरथ का सुंदर अभिनय सुरेश तीवारी ने किया, जबकि कौशल्या की भूमिका में सुरेश चौहान ने अपने मार्मिक मंचन से प्रसंग को प्रभावशाली बनाया। रामलीला देखने के लिए नगर सहित आसपास के क्षेत्रों से हजारों दर्शकों की उपस्थिति रही।


