धू—धू कर जली रावण की सोने की लंका

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो।
कैराना। गौशाला भवन में चल रहे श्रीरामलीला महोत्सव में बारहवें दिन माता सीता की खोज और लंका दहन की लीला का मंचन किया गया। हनुमान द्वारा लंका में आग लगाए जाने के दृश्य ने दर्शकों को रोमांचित कर दिया। देखते ही देखते रावण की सोने की लंका धू—धू कर जलने लगी।
मंचन में दिखाया गया कि प्रभु श्रीराम की आज्ञा से हनुमान समुद्र पार कर लंका पहुंचते हैं। वहां अशोक वाटिका में माता सीता को राक्षसियों के बीच बैठा देखकर उन्हें प्रभु श्रीराम द्वारा दी गई मुद्रिका भेंट करते हैं और अपना परिचय देते हुए उन्हें प्रभु श्रीराम का संदेश सुनाते हैं। इसके बाद माता सीता की आज्ञा लेकर हनुमान अशोक वाटिका में फल खाने पहुंचते हैं। इस दौरान वह पेड़ों से फल तोड़ने के साथ कई वृक्षों को भी तहस—नहस कर देते हैं। अशोक वाटिका के पहरेदारों ने हनुमान को रोकने का प्रयास किया, लेकिन वे सफल नहीं हो सके। इसकी सूचना रावण को दी गई। इस पर रावण ने अपने पुत्र अक्षय कुमार को सेना के साथ हनुमान को रोकने के लिए भेजा। हनुमान ने अक्षय कुमार का वध कर राक्षस सेना को परास्त कर दिया। यह समाचार मिलने पर रावण क्रोधित हो उठे और उन्होंने मेघनाथ को हनुमान को बंदी बनाकर दरबार में लाने का आदेश दिया। इसके बाद मेघनाथ और हनुमान के बीच हुए संवाद का दर्शकों ने खूब आनंद लिया। अंत में मेघनाथ ने ब्रह्मास्त्र का प्रयोग कर हनुमान को बंदी बना लिया और रावण के दरबार में ले गए। वहां हनुमान को दंड देने के लिए उनकी पूंछ में आग लगाने का निर्णय लिया गया। राक्षसों ने उनकी पूंछ में आग लगा दी। इसके बाद हनुमान ने लघु रूप धारण कर लिया और जलती पूंछ से पूरी लंका में आग लगा दी। उन्होंने विभीषण के महल को छोड़कर लंका के अन्य महलों को आग के हवाले कर दिया। लंका दहन के दृश्य के दौरान पूरा रामलीला परिसर जय श्रीराम के जयकारों से गूंज उठा।



