झखरावल की सरकारी जमीन पर बेदखली आदेश बेअसर?
7 डिसमिल भूमि पर कार्रवाई का इंतजार, राजस्व विभाग की भूमिका पर सवाल

तहसीलदार न्यायालय ने 26 मार्च 2026 को लगाया था ₹1,000 का अर्थदंड और बेदखली के निर्देश देने की जानकारी; बैजनाथ मिश्र पर आदिवासी व शासकीय भूमि पर कथित कब्जे के आरोप, एसडीएम कार्यालय में भूमिका की जांच की मांग
नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो।
वैढ़न, सिंगरौली। सरकारी जमीन को अतिक्रमण मुक्त कराने के लिए न्यायालयीन आदेश जारी होने के बावजूद कार्रवाई की स्थिति स्पष्ट नहीं होने से राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं। देवसर तहसील के ग्राम झखरावल में शासकीय भूमि से जुड़े मामले में शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि बेदखली के आदेश के बाद भी अतिक्रमण नहीं हटाया गया। अब सवाल यह है कि 26 मार्च 2026 के आदेश का पालन हुआ या फाइलों में ही कार्रवाई सिमटकर रह गई?
आदेश जारी, फिर भी अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई कहां?
उपलब्ध न्यायालयीन दस्तावेजों के अनुसार, ग्राम झखरावल में खसरा नंबर 46 की कुल 0.3300 हेक्टेयर शासकीय भूमि में से 0.0070 हेक्टेयर भूमि पर कथित अतिक्रमण के मामले में मध्यप्रदेश भू-राजस्व संहिता, 1959 की धारा 248 के तहत कार्रवाई की गई थी। तहसीलदार न्यायालय देवसर के 26 मार्च 2026 के आदेश में 1,000 रुपये का अर्थदंड लगाने और संबंधित भूमि से बेदखली की कार्रवाई के निर्देश दर्ज होने की जानकारी है।
शिकायतकर्ता का दावा है कि आदेश के बावजूद जमीन को अतिक्रमण मुक्त नहीं कराया गया। ऐसे में राजस्व विभाग को स्पष्ट करना चाहिए कि आदेश के अनुपालन में क्या कदम उठाए गए, मौके पर कार्रवाई हुई या नहीं और यदि मामला लंबित है, तो इसकी वजह क्या है। हालांकि, आदेश के वर्तमान क्रियान्वयन की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
10 एकड़ भूमि पर कथित कब्जे के आरोप, जांच की मांग
शिकायत में बैजनाथ मिश्र पर करीब 5 एकड़ आदिवासी भूमि और 5 एकड़ शासकीय भूमि पर कथित कब्जे के आरोप भी लगाए गए हैं। इन आरोपों की गंभीरता को देखते हुए संबंधित भूमि के स्वामित्व अभिलेख, खसरा-नक्शा, सीमांकन और वास्तविक कब्जे की स्थिति की जांच जरूरी है।
सवाल यह है कि यदि शिकायत में लगाए गए आरोपों में तथ्य हैं, तो संबंधित भूमि की स्थिति स्पष्ट करने के लिए अब तक क्या जांच हुई? हालांकि, उपलब्ध जानकारी के आधार पर इन कथित कब्जों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए निष्पक्ष जांच के बाद ही वास्तविक स्थिति सामने आ सकती है।
एसडीएम कार्यालय में किस हैसियत से काम करने का आरोप?
शिकायतकर्ता ने यह आरोप भी लगाया है कि बैजनाथ मिश्र एसडीएम कार्यालय में कंप्यूटर पर बैठकर काम करते हैं, जबकि उनकी आधिकारिक पदस्थापना अथवा कार्य करने की अनुमति की स्थिति स्पष्ट नहीं है। शिकायत में सवाल उठाया गया है कि यदि उन्हें कार्यालय में काम करने की अनुमति दी गई है, तो उसका प्रशासनिक आधार क्या है और सरकारी दस्तावेजों एवं फाइलों तक उनकी पहुंच किस सीमा तक है।
शिकायतकर्ता ने एसडीएम से कथित निकटता और उनके बेटे के एसडीएम की गाड़ी चलाने का हवाला देकर प्रभाव जताए जाने के आरोप भी लगाए हैं। इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। कार्यालयीन रिकॉर्ड, नियुक्ति या अनुमति संबंधी दस्तावेजों और संबंधित अधिकारियों के बयान के आधार पर ही इनकी वास्तविकता स्पष्ट हो सकती है।
प्रशासन के सामने तीन अहम सवाल
इस पूरे मामले में जिला प्रशासन और राजस्व विभाग से तीन बिंदुओं पर स्पष्ट जवाब अपेक्षित है—
- बेदखली आदेश पर अमल: 26 मार्च 2026 के आदेश के बाद संबंधित भूमि पर मौके की कार्रवाई हुई या नहीं?
- भूमि संबंधी शिकायत: आदिवासी और शासकीय भूमि पर कथित कब्जे के आरोपों की जांच, सीमांकन और अभिलेखों का सत्यापन कब होगा?
- कार्यालयीन भूमिका: एसडीएम कार्यालय में बैजनाथ मिश्र के कथित कामकाज की अनुमति और सरकारी दस्तावेजों तक उनकी पहुंच का आधार क्या है?
जांच के बाद ही स्पष्ट होगी वास्तविक स्थिति
शिकायतकर्ता ने जिला प्रशासन से न्यायालयीन आदेश के पालन की स्थिति सार्वजनिक करने, संबंधित भूमि का सीमांकन कराने और कथित अतिक्रमण के आरोपों की निष्पक्ष जांच की मांग की है। साथ ही एसडीएम कार्यालय में बैजनाथ मिश्र की भूमिका और वहां काम करने की अनुमति की भी जांच कराने की मांग उठाई गई है।
अब निगाहें प्रशासनिक कार्रवाई पर हैं। सरकारी जमीन से जुड़े आदेशों का पालन और कार्यालयीन व्यवस्था में पारदर्शिता सुनिश्चित करना प्रशासन की जिम्मेदारी है




