औरंगाबाद में बंदरों कुत्तों और मच्छरों की भरमार
तमाम ज्ञापन, शिकायतें, और उच्चाधिकारियों से गुहार साबित हुई बेकार

स्कूली बच्चों को सता रहा बंदरों का डर
नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो
औरंगाबाद बुलंदशहर कस्बे में बंदरों,आवारा कुत्तों और मक्खी मच्छरों की भरमार चरम पर है। तमाम ज्ञापन, शिकायतें और उच्चाधिकारियों से लगाई गई राहत दिलाने की गुहार रद्दी की टोकरी में डाल दी गई हैं। नगर पंचायत के सर्वेसर्वा मौन होकर चैन की बंशी बजाने में मशगूल हैं।
जनपद बुलंदशहर की नगर पंचायत औरंगाबाद में सड़कों गलियों मौहल्लों में आवारा कुत्तों की भरमार है। आये दिन कुत्तों से काटे जाने की घटनाएं प्रकाश में आतीं हैं । कस्बे के वाशिंदों को कुत्तों के साथ साथ बंदरों के उत्पात से भी जूझना पड़ता है। जहांगीराबाद रोड़ चौराहे पर रात के समय तो बंदरों का पूरा साम्राज्य ही स्थापित हो जाता है। घरों की छतों पर बंदरों का आतंक हर समय दुर्घटना का डर बनाए रहता है। कस्बे वासियों को मच्छरों के प्रकोप के चलते बुखार टाइफायड मलेरिया का प्रकोप झेलना पड़ रहा है। बुखार के प्रकोप के चलते डाक्टरों के क्लीनिकों में मरीजों की भरमार आम है । लेकिन कोई सुध लेने वाला नहीं है।
ऐसा नहीं है कि कस्बे से इन समस्याओं के निजात दिलाने की मांग ना उठाई गई हो। तमाम व्यापारी नेता जिले के उच्चाधिकारियों को ज्ञापन देकर फोटो खिंचवाने से भी पीछे नहीं रहे लेकिन नतीजा सिफर ही रहा। आश्वासन तो बहुत मिले लेकिन नतीजा ढाक के पात ही रहा।
कस्बे के उच्च प्राथमिक विद्यालय में गुरुवार को बंदरों का उत्पात चरम पर देखने में आया। बंदरों ने स्कूल की जूनियर कक्षाओं के कक्षों में घुस कर वहां रखे चार्ट,डृाईंग, पंखे, ट्यूबलाइट,बल्व ,शीट, आदि तोड़ फोड़ कर कबाड़ में तब्दील कर दिए। बंदरों के उत्पात की शिकायत प्रधान अध्यापिका ने नगर पंचायत के सर्वेसर्वा को लिखित शिकायती पत्र देकर बंदरों से बच्चों को खतरे का अंदेशा जताते हुए बंदरों को पकड़वाने की मांग की है।
देखना दिलचस्प होगा कि नगर पंचायत के सर्वेसर्वा मौन रहते हैं अथवा स्कूली बच्चों को बंदरों के आतंक से मुक्ति दिलाने के लिए कुछ कार्रवाई अमल में लाते हैं।



