क्या हैं शौर्य कमांडो
चीन से तनाव के बीच जिन्हें आईटीबीपी ने तैयार किया; अरुणाचल में कैसी तैयारी?

अरुणाचल में भारत-चीन की सीमा पर हालिया समय में क्या हुआ है? यह शौर्य कमांडोज क्या हैं, जिन्हें सीमाई क्षेत्र में चीन से निपटने के लिए तैनात किया गया है? इनके बारे में अब तक क्या-क्या जानकारियां सामने आई हैं? भारत ने चीन से निपटने के लिए अपनी रणनीति में क्या बदलाव किया है?
भारत और चीन के बीच तनाव एक बार फिर चरम स्तर पर पहुंचता दिख रहा है। दरअसल, बीते कुछ महीनों से अरुणाचल प्रदेश की सीमा के करीब दोनों देशों की सेनाओं के बीच कुछ मौकों पर आमना-सामना होने की खबर सामने आई थीं। अब इंडो-तिब्बती बॉर्डन पुलिस (आईटीबीपी) के निदेशक जनरल शत्रुजीत सिंह कपूर ने इसकी पुष्टि की है। उन्होंने कहा है कि बीते कुछ दिनों में अरुणाचल प्रदेश में कुछ स्थानों पर सैनिकों के बीच आमना-सामना हुआ है। हालांकि, इसी के साथ उन्होंने यह भी कहा कि हाल ही में बनाई गई शौर्य कमांडोज की टीम ने टकराव की स्थिति में चीनी सेना के खिलाफ जबरदस्त प्रदर्शन किया है। उन्होंने कहा कि यह कमांडो हर बटालियन में होंगे और सैन्यबल को अलग पहचान देंगे।
आईटीबीपी डीजी ने यह पूरी जानकारी राजस्थान के अलवर में आईटीबीपी जवानों के एक सम्मान समारोह के दौरान कहीं। उनके बयानों के सामने आने के बाद जहां एक तरफ देश की सियासत गरमा गई है, वहीं कई लोगों के मन में ‘शौर्य कमांडोज’ के जिक्र ने कौतूहल भी पैदा किया है। वैसे यह पहली बार नहीं है, जब देश में शौर्य कमांडोज का जिक्र किया गया हो। इससे पहले भी कुछ मौकों पर इनकी चचार्एं हुई हैं।
आइये जानते हैं कि यह शौर्य कमांडोज क्या हैं और इनके बारे में अब तक क्या-क्या जानकारियां सामने आई हैं?
क्या हैं शौर्य कमांडोज, जो अरुणाचल सीमा पर चीन से ले रहे टक्कर?
भारतीय सेना के बाद अब आईटीबीपी डीजी की तरफ से जो जानकारी सामने आई है, उसके मुताबिक शौर्य कमांडोज इस सशस्त्र बल के अंदर ही बनाई गई एक खास संघर्ष टुकड़ी है, जो कि चीन सीमा पर सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के लिए बनाई गई है। एसएस कपूर ने शौर्य कमांडोज का जिक्र करते हुए कहा कि यह नई कॉम्बैट टीम, अब हर सीमाई बटालियन का हिस्सा होगी और आईटीबीपी को अलग पहचान देगी।
उन्होंने कहा कि अरुणाचल में चीन सीमा पर पारंपरिक ढंग से संघर्ष अब पुराने समय की बात हो गई है इसलिए सैन्यबल के आधुनिकीकरण, इसके हथियारों, वाहनों और बॉर्डर पोस्ट्स के आधुनिकीकरण में निवेश बढ़ाया जा रहा है। माना जा रहा है कि इसी निवेश के जरिए आईटीबीपी अब चीन सीमाओं पर केंद्रित एक ऐसी टुकड़ी गठित कर रही है, जो कि सिर्फ ऊंचाई वाली जगहों पर संघर्ष के लिए तय होंगी।
गौरतलब है कि शौर्य कमांडोज का जिक्र पहली बार नहीं हो रहा है। इससे पहले इनका जिक्र भारतीय सेना की तरफ से भी किया जा चुका है। कुछ समय पहले ही सेना के दक्षिण कमांड ने अपने एक्स हैंडल पर पोस्ट कर कहा था कि सैन्य ढांचे के अंदर एक ऐसी टुकड़ी को तैयार किया जा रहा है, जो कि आधुनिक-सामरिक पक्ष में सबसे आगे होगी। सेना की तरफ से अमोघ ज्वाला नाम के एक अभ्यास में शौर्य स्क्वाड्रन के कमांडोज के शामिल होने की जानकारी दी गई थी।
दक्षिणी कमांड ने कहा था, “युद्धक्षेत्र की वास्तविक परिस्थितियों में परखे गए इस शौर्य स्क्वाड्रन ने एक आधुनिक लड़ाकू इकाई के रूप में अपनी क्षमताओं का अभ्यास किया। इसमें सटीक हमले, गहन निगरानी और करीबी युद्ध-क्षेत्र की टोह को आपस में बेहतरीन ढंग से जोड़ा गया था। दूर तक देखने, गहराई में जाकर हमला करने और लंबे समय तक डटे रहने के लिए तैयार, ‘शौर्य स्क्वाड्रन’ ने साबित किया कि वह वास्तविक समय में जानकारी जुटाने के साथ-साथ, त्वरित और सटीक हमले करने में भी सक्षम है। इस अभ्यास से अहम परिचालन जानकारियां मिलीं, जो यह दशार्ती हैं कि आधुनिक युद्धक्षेत्र में टोह लेने की प्रभावशीलता को काफी हद तक बढ़ाने की क्षमता इस स्क्वाड्रन में मौजूद है।”
आईटीबीपी के डीजी शत्रुजीत सिंह कपूर ने पुष्टि की है कि बीते कुछ महीनों में अरुणाचल प्रदेश में कई जगहों पर दोनों देशों के सैनिकों का आमना-सामना हुआ है और तनाव की स्थिति के बीच टकराव बना हुआ है।
कांग्रेस का दावा है कि स्थानीय लोग अरुणाचल में कई गश्ती ठिकानों के खोने का दावा कर रहे हैं। पार्टी ने कहा कि बीते महीने ताक्सिंग में हुए टकराव के बाद वाचा और दमई में कोर कमांडर स्तर की वार्ता हुई है।
अरुणाचल में चीन से निपटने के लिए और किस तरह की तैयारी?
अरुणाचल में चीन से जारी टकराव की स्थिति के बीच खुद आईटीबीपी प्रमुख ने भारत की तैयारियों को लेकर जानकारी दी है।



