बरेली

देवर्षि नारद ब्रह्मांड के प्रथम और आदर्श पत्रकार: जयंती पर पत्रकारों ने किया नमन

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो
बरेली : सृष्टि के आदि पत्रकार और संचार के अधिष्ठाता देवता देवर्षि नारद की जयंती तिथि हर्षोल्लास के साथ मनाई गई। इस अवसर पर आयोजित एक विशेष संगोष्ठी में वरिष्ठ पत्रकारों और प्रबुद्धजनों ने नारद जी के जीवन दर्शन और आज के दौर में उनकी प्रासंगिकता पर विस्तार से प्रकाश डाला। वक्ताओं ने एक स्वर में कहा कि देवर्षि नारद केवल सूचनाओं के वाहक नहीं थे, बल्कि वे लोक कल्याण के लिए संवाद स्थापित करने वाले ब्रह्मांड के पहले पत्रकार थे।
लोक कल्याण ही पत्रकारिता का मूल: वक्ताओं ने कार्यक्रम के दौरान वरिष्ठ पत्रकार प्रदीप कुमार गुप्ता ने कहा कि नारद जी ने सदा सत्य और धर्म की स्थापना के लिए सूचनाओं का आदान-प्रदान किया। उनका मूल मंत्र ‘कल्याण’ था। वहीं सचिन मिश्रा ने उनके व्यक्तित्व पर चर्चा करते हुए कहा कि कठिन परिस्थितियों में भी निष्पक्ष रहना ही एक सच्चे पत्रकार की पहचान है, जो हमें नारद जी से सीखनी चाहिए।
दीपक कुमारने वर्तमान पत्रकारिता की चुनौतियों का उल्लेख करते हुए बताया कि नारद जी का संवाद कौशल आज के दौर के मीडिया के लिए एक बड़ी सीख है। गोपाल गुप्ताने जोर देकर कहा कि देवर्षि नारद ने कभी भी  निजी स्वार्थ के लिए सूचना का उपयोग नहीं किया, बल्कि वे देवताओं और असुरों के बीच भी शांति स्थापना का माध्यम बने।
संगोष्ठी में राकेश शर्मा ने कहा कि जिस तरह नारद जी तीनों लोकों में अबाध गति से भ्रमण करते थे, आज का पत्रकार भी  उसी फुर्ती और सत्यता के साथ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुँचने का प्रयास कर रहा है।भारत गंगवार ने अपने संबोधन में कहा कि नारद जयंती को ‘विश्व पत्रकारिता दिवस’ के रूप में देखना गौरव की बात है। उन्होंने कहा कि नारद जी की ‘नारायण-नारायण’ की गूंज दरअसल ईश्वरीय चेतना का ही विस्तार थी।
प्रदीप कुमार गुप्ता नारद जी की पत्रकारिता लोकहित के लिए समर्पित थी।”
सचिन मिश्रा: “निष्पक्षता और निर्भीकता ही नारद भक्ति का मार्ग है।”
 दीपक कुमार “संवाद में मधुरता और सत्य का समावेश होना चाहिए।”
 गोपाल गुप्ता “सूचनाओं का सही विश्लेषण करना ही पत्रकारिता का धर्म है।”
 राकेश शर्मा “तीनों लोकों के बीच सेतु थे देवर्षि नारद।” भारत गंगवार “आधुनिक मीडिया को नारद जी के आदर्शों पर चलने की आवश्यकता है।” कार्यक्रम के अंत में सभी पत्रकारों ने देवर्षि नारद के चित्र पर माल्यार्पण किया और समाज की सेवा के लिए अपनी कलम को सदैव सत्य की राह पर चलाने का संकल्प लिया।
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