बेतुल
बैतूल केंद्रीय राज्य मंत्री दुर्गादास उइके के खिलाफ कथित अभद्र टिप्पणी पर आदिवासी समाज और राजनीतिक दलों की चुप्पी क्यों?
वायरल वीडियो को लेकर उठ रहे सवाल, एफआईआर दर्ज कराने की पहल और भाजपा की प्रतिक्रिया पर टिकी निगाहें

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो
बैतूल। केंद्रीय राज्य मंत्री दुर्गादास उइके को लेकर सोशल मीडिया पर वायरल हुए कथित अभद्र टिप्पणी के वीडियो ने जिले में एक नई चर्चा को जन्म दिया है। वीडियो में कथित तौर पर अपमानजनक शब्दों का इस्तेमाल किए जाने को लेकर सवाल उठ रहे हैं। अब इस मामले में पुलिस कार्रवाई, आदिवासी समाज के प्रतिनिधियों की भूमिका और राजनीतिक दलों की प्रतिक्रिया को लेकर लोगों की निगाहें टिकी हुई हैं।
आखिर एफआईआर दर्ज कराने की पहल क्यों नहीं दिख रही?
वायरल वीडियो को लेकर सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि यदि किसी जनप्रतिनिधि के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी की गई है, तो मामले में शिकायत दर्ज कराने के लिए अब तक क्या पहल हुई है? आदिवासी समाज के सामाजिक संगठनों, जनप्रतिनिधियों और अन्य जिम्मेदार लोगों की ओर से इस मुद्दे पर कोई औपचारिक शिकायत की गई है या नहीं, यह स्पष्ट होना बाकी है।
केंद्रीय राज्य मंत्री दुर्गादास उइके आदिवासी समाज से आते हैं। ऐसे में इस मामले को लेकर समाज के विभिन्न संगठनों और प्रतिनिधियों की प्रतिक्रिया पर भी चर्चा हो रही है। सवाल यह है कि क्या संबंधित संगठनों ने मामले को गंभीरता से लेते हुए पुलिस प्रशासन के समक्ष अपना पक्ष रखा है? यदि शिकायत की गई है, तो उस पर अब तक क्या कार्रवाई हुई है?
राजनीतिक दलों की खामोशी भी चर्चा में
इस मामले में केवल सामाजिक संगठनों ही नहीं, बल्कि राजनीतिक दलों की भूमिका को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। विशेष रूप से भारतीय जनता पार्टी के स्थानीय नेताओं और संगठन की ओर से इस कथित टिप्पणी पर क्या रुख अपनाया गया है, इसे लेकर लोगों में जिज्ञासा है।
दुर्गादास उइके केंद्र सरकार में राज्य मंत्री हैं और बैतूल जिले की राजनीति में उनका महत्वपूर्ण स्थान है। ऐसे में वायरल वीडियो को लेकर भाजपा संगठन की आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आना महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सवाल यह भी है कि पार्टी के स्थानीय पदाधिकारी इस मामले में शिकायत, जांच और उचित कार्रवाई की मांग को लेकर क्या कदम उठा रहे हैं।
हालांकि, किसी संगठन या राजनीतिक दल की चुप्पी के पीछे का कारण बिना आधिकारिक जानकारी के तय नहीं किया जा सकता। संबंधित पक्षों का बयान सामने आने के बाद ही स्थिति अधिक स्पष्ट हो सकेगी।



