खैरथल
धूं-धूं करके जला अंहकार का प्रतीक रावण
भिवाड़ी से खैरथल तक दशहरे की धूम, 51 फीट के रावण के साथ कुंभकरण-मेघनाथ का भी दहन; 30 से अधिक गांवों के लोग पहुंचे मेला देखने

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो।
खैरथल। अधर्म के दस सिर और बीस भुजाएं जब आग की लपटों में समाकर राख हुईं, तो पूरा दशहरा मैदान जय श्रीराम के जयकारों से गूंज उठा। रंग-बिरंगी आतिशबाजी से आसमान रोशन हुआ और हजारों लोगों ने बुराई पर अच्छाई की जीत का साक्षी बनकर विजयादशमी का पर्व मनाया। भिवाड़ी, खैरथल सहित आसपास के गांवों और शहरों में रावण दहन के साथ धर्म की विजय का संदेश दिया गया।
खैरथल के पीएम श्री राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय में मंगलवार को दशहरा मेले का आयोजन किया गया। यहां 51 फीट ऊंचे रावण, 41 फीट के कुंभकरण और 31 फीट के मेघनाथ के पुतले आकर्षण का केंद्र रहे। शाम 6:30 बजे सीतारामजी की झांकी निकाली गई। झांकी दशहरा स्थल पहुंची, जहां पूजा-अर्चना के बाद रावण दहन किया गया। पुतलों के धू-धू कर जलते ही मैदान तालियों और जयकारों से गूंज उठा।
आधे घंटे तक आतिशबाजी, एलईडी पर भी देखा रावण दहन
रावण दहन से पहले रंगीन आतिशबाजी ने मेले का रोमांच बढ़ा दिया। करीब आधे घंटे तक हुई आतिशबाजी देखने के लिए लोगों की नजरें आसमान पर टिकी रहीं। दशहरा स्थल पर खैरथल शहर सहित आसपास के 30 से अधिक गांवों से लोग पहुंचे। भीड़ को देखते हुए रावण दहन का नजारा सभी तक पहुंचाने के लिए दो बड़ी एलईडी स्क्रीन भी लगाई गईं।
मेले में उमड़ी भीड़, महिलाओं-बच्चों को हुई परेशानी
दशहरा मेले में रंग-बिरंगी झांकियों, खेल-तमाशों और खानपान की दुकानों ने बच्चों से लेकर बड़ों तक को आकर्षित किया। हालांकि, भीड़ अधिक होने से महिलाओं और बच्चों को असुविधा का सामना करना पड़ा। सड़क किनारे बड़ी संख्या में बाइकें खड़ी नजर आईं। मेले की रौनक के बीच व्यवस्थाओं को लेकर भी लोगों को परेशानी हुई।
जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों ने की शिरकत
कार्यक्रम में केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव, पूर्व विधायक रामहेत यादव, नगर परिषद सभापति विक्रम चौधरी, एडीएम शिवपाल जाट, डीएसपी लालसिंह यादव, आयुक्त मुकेश शर्मा ,जेईएन मोतीलाल,थानाप्रभारी यादव
, कालू पंडित शर्मा, मुरारी लाल शर्मा, टिल्लू भाई किसान नेता,अनील माधु, महेंद्र सिंह टिंकू सहित अन्य लोग मौजूद रहे। दशहरा मेला केवल मनोरंजन का आयोजन नहीं, बल्कि सामाजिक एकता, सांस्कृतिक परंपराओं और सत्य की जीत का प्रतीक भी बना। रावण दहन के साथ लोगों ने बुराइयों का त्याग कर सदाचार अपनाने का संदेश दिया।



