धर्ममथुरा

श्रीकृष्ण जन्मभूमि मामले में आया बड़ा फैसला

हाईकोर्ट ने ईदगाह को ‘विवादित ढांचा’ मानने से किया इनकार

मथुरा : में श्रीकृष्ण जन्मभूमि और शाही ईदगाह विवाद से जुड़े महत्वपूर्ण मुकदमे में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने ईदगाह को ‘विवादित ढांचा’ मानने से साफ इनकार कर दिया है। हिंदू पक्ष की ओर से दावा किया गया था कि शाही ईदगाह का निर्माण भगवान श्रीकृष्ण के प्राचीन मंदिर को तोड़कर किया गया है और इसे अयोध्या के बाबरी मस्जिद मामले की तरह ‘विवादित’ घोषित किया जाना चाहिए। लेकिन हाईकोर्ट ने उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर फिलहाल इस मांग को ठुकरा दिया है। जस्टिस राम मनोहर मिश्रा की सिंगल बेंच ने यह फैसला सुनाया, जिससे इस बहुचर्चित मामले में नई कानूनी दिशा तय हो गई है। श्रीकृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह विवाद में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हिंदू पक्ष की याचिका खारिज करते हुए कहा कि शाही ईदगाह को ‘विवादित ढांचा’ घोषित करने का कोई ठोस आधार नहीं है। कोर्ट ने कहा कि मौजूदा दस्तावेज़ों और प्रस्तुत साक्ष्यों के अनुसार ईदगाह को फिलहाल विवादित घोषित नहीं किया जा सकता। यह फैसला 23 मई को बहस पूरी होने के बाद 4 जुलाई को सुनाया गया। हिंदू पक्ष की ओर से महेंद्र प्रताप सिंह एडवोकेट ने 5 मार्च 2025 को याचिका दाखिल की थी। उन्होंने अपने तर्कों में इतिहासकारों की पुस्तकों, पुरातात्विक तथ्यों और सरकारी दस्तावेजों का हवाला दिया। महेंद्र प्रताप सिंह का कहना था कि ईदगाह का कोई भी आधिकारिक रिकॉर्ड न तो खसरा-खतौनी में दर्ज है, न नगर निगम में और न ही कर भुगतान का कोई प्रमाण उपलब्ध है। उन्होंने ईदगाह कमेटी पर बिजली चोरी का मामला भी कोर्ट के सामने रखा। हिंदू पक्ष ने यह भी दलील दी थी कि जिस प्रकार अयोध्या में बाबरी मस्जिद को ‘विवादित ढांचा’ घोषित किया गया था, उसी तरह मथुरा में शाही ईदगाह को भी इसी श्रेणी में रखा जाए। महेंद्र प्रताप सिंह ने कोर्ट में कहा था कि अगर पुरातत्व विभाग का सर्वे कराया जाए तो वास्तविकता स्पष्ट हो जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि विदेशी यात्रियों और पुराने इतिहासकारों ने वहां मंदिर का ही उल्लेख किया है, मस्जिद का कोई प्रमाण नहीं मिला। मस्जिद पक्ष ने हिंदू पक्ष के सभी दावों का सख्त विरोध किया। उनका कहना था कि ईदगाह वर्षों से धार्मिक स्थल के रूप में मौजूद है और इसे विवादित कहना उचित नहीं होगा। मस्जिद पक्ष ने हिंदू पक्ष के ऐतिहासिक प्रमाणों और दस्तावेजों पर भी सवाल उठाए। कोर्ट ने सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद फिलहाल किसी भी पक्ष के हक में विवादित ढांचा घोषित करने से इनकार कर दिया।
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