झुंझुनू
प्रशासन से आर-पार की लड़ाई के मूड में झुंझुनूं के पत्रकार
11 बजे तक प्रशासन ने नहीं बदला अपना रवैया, तो करेंगे 'ग्रुप छोड़ो आंदोलन
नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो।
झुंझुनूं। सूचना केंद्र के भवन को एसीबी न्यायालय के लिए जबरदस्ती आवंटन के खिलाफ पत्रकारों द्वारा शुरू किया गया आंदोलन अब जोर पकड़ने लग गया है। सांसद बृजेंद्र ओला, विधायक पितरामसिंह काला, विधायक रीटा चौधरी, पूर्व विधायक शुभकरण चौधरी, पूर्व मंत्री राजेंद्र सिंह गुढ़ा, भाजपा नेता बबलू चौधरी, मंडावा चेयरमैन नरेश सोनी, कांग्रेस नेता संदीप सैनी उदयपुरवाटी, काजड़ा सरपंच मंजू तंवर समेत रविवार को सिर्फ एक सूचना मात्र से करीब तीन दर्जन से अधिक संगठनों ने पत्रकारों के आंदोलन को समर्थन दिया है। वहीं अपने अपने क्षेत्र के पत्रकारों के जरिए अपना समर्थन पत्र भेजते हुए कहा है कि यदि इस लड़ाई के लिए धरना, प्रदर्शन या फिर कहीं पर भी कुछ भी आंदोलन करना पड़ा तो वे तैयार है। इधर, पत्रकारों ने तय किया है कि सोमवार को सुबह 11 बजे तक यदि जिला प्रशासन अपने हठधर्मी रवैये को छोड़कर एसीबी न्यायालय के लिए सूचना केंद्र की बजाय कहीं पर भी उपयुक्त जगह आवंटित करने का आश्वासन या फिर आदेश नहीं देता है तो इसके बाद एक साथ जिले के सभी पत्रकार सूचना एवं जनसंपर्क विभाग झुंझुनूं कार्यालय द्वारा बनाए गए पत्रकारों के व्हाट्स ग्रुप से लेफ्ट होकर ‘ग्रुप छोड़ो आंदोलन’ को आगे बढाया जाएगा। इसके साथ साथ ही सांसद, विधायकों और भाजपा नेताओं ने पत्रकारों को भरोसा दिलाया है कि वे इस मामले में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और मुख्य सचिव सुधांशु पंत से मिलने को तैयार है। ऐसे में सोमवार शाम को या फिर मंगलवार को सीएम व सीएस से मिलने का कार्यक्रम तय किया जा रहा है।
*इन संगठनों ने कहा— हम है पत्रकारों के साथ*
झुंझुनूं जिले के अलग—अलग संगठनों ने पत्रकारों का आंदोलन में साथ देने की बात कही है। साथ ही अपनी मांग को लेकर ईमेल के जरिए मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव को भी अवगत करवाया गया है। इनमें प्रमुख रूप से मुस्लिम न्याय मंच झुंझुनूं, जय किसान आंदोलन राजस्थान, सरला पाठशाला चिड़ावा, देवसेना संगठन झुंझुनूं, अखिल भारतीय किसान सभा, जिला सैनी युवा महासंघ झुंझुनू, जनसमस्या निराकरण मंच इस्लामपुर, राजस्थान वाहन चालक एवं तकनीकी महासंघ, गौ सेवा संवर्धन संस्थान, स्वामी समाज झुंझुनूं, स्वर्णकार समाज सेवा समिति झुंझुनूं, राजस्थान आदर्श जाट महासभा, राष्ट्रीय जाट महासंघ, अग्रवाल समाज समिति झुंझुनूं, लोक सेवा ज्ञान मंदिर ट्रस्ट मंडावा, मानवाधिकार समाजिक न्याय आयोग, झुंझुनूं युवा राजपूत महासभा, विप्र फाउंडेशन झुंझुनूं, फोटोग्राफर समिति झुंझुनूं, राष्ट्रीय गौ रक्षक सेना, कामधेनु निराश्रित सेवा समिति मंडावा, प्रदेश निजी चिकित्सालय संगठन उपचार, आदिवासी श्री मीन सेना, इत्तेहादुल मुस्लिमीन सयोसायटी झुंझुनूं, एसएफआई, डीवाईएफआई, एनएसयूआई, शहीद भगत सिंह जन संघर्ष समिति, उदयपुरवाटी प्रेस क्लब, भ्रष्टाचार निरोधक एवं जनकल्याणकारी संस्था, युवा कांग्रेस झुंझुनूं आदि शामिल है।
*आज एसएफआई और डीवाईएफआई प्रदर्शन करेगी*
इसी मामले को लेकर एसएफआई और डीवाईएफआई सोमवार को कलेक्ट्रेट पर प्रदर्शन करेगी। कॉमरेड पंकज गुर्जर ने बताया कि रैली के रूप में दोनों संगठनों के कार्यकर्ता कलेक्ट्रेट पहुंचेंगे। इसके बाद मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव के नाम जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा जाएगा। जिसमें मांग की जाएगी कि सूचना केंद्र को सिर्फ पत्रकारों के उपयोग और सुविधा की जगह ही रहने दी जाए। इसमें कोई फेरबदल ना हो। एसीबी न्यायालय के लिए प्रशासन के पास जिला मुख्यालय पर कई और भी जगह है और कई अच्छे विकल्प है। इसलिए जिला कलेक्टर डॉ. अरूण गर्ग से मांग की जाएगी कि एडीएम डॉ. अजय कुमार आर्य की झूठी और भ्रमित करने वाली बातों में ना आकर सर्वहित और सौहार्दभर फैसला लें।
*मंडावा के सामाजिक संगठन व जनप्रतिनिधि आए पत्रकारों के पक्ष में*
इधर, झुंझुनूं जिला मुख्यालय पर स्थित सूचना केंद्र भवन के अधिग्रहण के प्रयासों के विरुद्ध जिले के पत्रकारों द्वारा उठाई जा रही आवाज के साथ मंडावा के संगठन और जनप्रतिनिधि भी जुड़ गए है। जिन्होंने मांग को पूरी तरह उचित और न्यायसंगत बताया है। पत्रकारों के पक्ष में कई सामाजिक संगठन व जनप्रतिनिधि भी खुलकर अपना समर्थन दे रहे हैं। विधायक रीटा चौधरी, मंडावा नगर पालिका अध्यक्ष नरेश सोनी, पूर्व भाजपा मंडल अध्यक्ष विजेंद्र सैनी के अलावा लोक सेवा ज्ञान मंदिर ट्रस्ट के मंडावा तहसील अध्यक्ष राजेश रणजीरोत, कामधेनु निराश्रित गौ सेवा समिति मंडावा के अध्यक्ष रविंद्र शर्मा, झुंझुनू युवा राजपूत महासभा के जिला अध्यक्ष दिलीप सिंह वाहिदपुरा, गौड़ ब्राह्मण महासभा संस्थान के जिला अध्यक्ष जितेंद्र इंदौरिया व पर्यटन व्यवसायी किशोर थलिया ने जिले के पत्रकारों को अपना समर्थन देते हुए कहा कि प्रेस लोकतंत्र का चौथा स्तंभ है, और उसके अस्तित्व, गरिमा और सुविधाओं से छेड़छाड़ किसी भी सूरत में स्वीकार नहीं की जा सकती। यह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है कि पूर्व में मिले स्पष्ट आश्वासनों के बावजूद पुनः पीआरओ कार्यालय की बिल्डिंग को एसीबी न्यायालय के लिए आवंटित करने की प्रक्रिया शुरू की गई। इससे न केवल पत्रकारों की सुविधाएं प्रभावित होंगी। बल्कि वाचनालय एवं पुस्तकालय जैसी अहम संस्थाएं भी समाप्त हो जाएंगी। पत्रकार साथियों के इस संघर्ष में पूर्ण समर्थन प्रकट करते है ओर हम प्रशासन से मांग करते हैं की सूचना केंद्र परिसर की मूल संरचना और उद्देश्य से छेड़छाड़ तत्काल रोकी जाए, एसीबी न्यायालय के लिए अन्य वैकल्पिक सरकारी भवनों की पहचान की जाए, जैसे किसान सेवा केंद्र, पुराने डाक बंगले आदि है तथा दोषी अधिकारियों की भूमिका की निष्पक्ष जांच हो और जवाबदेही तय की जाए। यदि पत्रकारों की मांगों को नजरअंदाज किया गया तो बड़े स्तर पर आंदोलन में पत्रकारों का खुलकर साथ देंगे। तथा पत्रकारों की आवाज को दबाने का कोई भी प्रयास हम सहन नहीं करेंगे क्योंकि पत्रकारों के हक में मजबूती से उनके साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े रहेंगे।
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