तनवीर आलम का प्रयास इच्छाशक्ति की झलक, ग्रामीणों की वर्षों की उम्मीद सड़कों पर दौड़ती दर हक़ीक़त पेश
Tanveer Alam's efforts are a glimpse of willpower, the villagers' years of hope is presented as a reality running on the roads

नेशनल प्रेस टाइम्स ब्यूरो।
पाकुड़ प्रखण्ड क्षेत्र अन्तर्गत कुसमनगर गांव में विकास की नई किरण इन दिनों जगजाहिर है। जहां पैदल चलना भी कभी मुश्किल था, जहां चलने के लिए रास्ता नहीं था, वहां आज चल रही है उम्मीद की राह। आज स्थानीय निवासियों की ज़िंदगी में एक नई रौशनी, एक नई उम्मीद जागी है। छोटे – मोटे व्यावसायिकों सब्जी, मछली अन्य सामान साइकिल/ मोटरसाइकिल या फिर पैदाल से इस रुट के माध्यम से डोर टू डोर आसानी से टेकअप करते हुए व्यवसाय कर वो भी अपनी परिवार की भरण पोषण आसानी से कर ले रहे हैं। कलम की स्याही अचानक पाकुड़ ज़िले के कुसमनगर गांव की वर्षों पुरानी दास्तां, जहां विकास के नाम पर वर्षों तक सन्नाटा पसरा रहा था, उसे अखबारों के पन्नों में दर्शाने में बेताब जैसा एहसास किया। लेकिन अब वहां हालात बदल चुके हैं। झारखंड प्रदेश महासचिव तनवीर आलम का नेक किरदार से गांव को एक नई राह मिल गई। प्रखण्ड पाकुड़ क्षेत्रान्तर्गत पंचायत तारानगर स्थित तोराई नदी के तट पर बसे कुसमनगर गांव एक ऐसा इलाका, जहां एक छोर से दूसरे छोर तक जाने के लिए कोई रास्ता/ साधन नहीं था। जहां ग्रामीणों को जान हथेली पर रखकर नदी किनारे से पार करना पड़ता था, जहां बरसात आते ही गांव पूरी तरह से अलग-थलग पड़ जाता था। और लबालब भरे नदी की तेज धारा हृदय को एक अजीब सी हलचल का एक इत्तेला देया करता था। जहां कभी तरक्की के लिए लोग तरसते थे। बरसों से लोग इस रास्तों से परेशान थे। बारिश में कीचड़, धूप में धूल और बीमारियों से भरे रास्ते लोगों की किस्मत बन चुके थे। लेकिन अब वो दौर पीछे छूट गया है। अब वहां नदी के ऊपर बनी है बोल्डर क्रेटिंग गार्डवॉल सह- पीसीसी सड़क । जिसका एहसास तो होता है कि मज़बूत, सुरक्षित और टिकाऊ रास्ता। मगर गुणवत्ता की दर हक़ीक़त तो समय गुजरने के साथ ही चश्मे मासूक की तरह झलकता हुआ प्रकाश में आयेगा। मगर इस परिवर्तन की शुरूआत हुई जब झारखण्ड प्रदेश कांग्रेस महासचिव तनवीर आलम ने गांव की समस्याओं को अपनी ज़िम्मेदारी समझा। उन्होंने न सिर्फ फील्ड विज़िट की, बल्कि प्रशासन से लेकर ज़मीनी स्तर तक हर सम्भव प्रयास किया। जिसका नतीजा है कि कुसमनगर गांव में विकास की रफ्तार दौड़ पड़ी है। बुजुर्ग हो या बच्चे, हर किसी के चेहरे पर राहत और खुशी साफ नज़र आ रही है। कुसमनगर की यह कहानी सिर्फ एक गांव की नहीं है, यह उस सोच और संकल्प की कहानी है, जो अगर ठान ली जाए, तो कोई भी बदलाव नामुमकिन नहीं होता। यह काम न केवल एक रास्ता बना गया, बल्कि एक उम्मीद भी जगा गया।



