
कर्मचारियों से लेकर फरियादियों तक को झेलनी पड़ रही भारी परेशानी
संवाददाता,
जनपद बागपत
जिस विकास भवन से जिले की योजनाएं संचालित होती हैं, वह खुद बदहाल हालात में कराह रहा है। जिले के दर्जनों सरकारी विभागों के कार्यालय वाली इस चार मंजिला इमारत में स्वच्छता मिशन और घर-घर शौचालय निर्माण योजना जैसे कार्यक्रम तो चलाए जा रहे हैं, लेकिन इमारत के भीतर मूलभूत सुविधाएं तक नदारद हैं।
टॉयलेट और पीने के पानी की व्यवस्था नाम मात्र की है। शौचालयों की हालत बदतर है—सीटें टूटी हुई हैं, दरवाजे गायब हैं और गंदगी का अंबार लगा रहता है। इससे कर्मचारियों के साथ-साथ फरियादी भी बेहद परेशान हैं।
बुनियादी सुविधाओं से महरूम कर्मचारी, सुनवाई नहीं
चार मंजिला इस भवन में करीब डेढ़ दर्जन से अधिक विभाग हैं, जिनमें सैकड़ों कर्मचारी कार्यरत हैं। सीडीओ समेत कई जिला स्तरीय अधिकारियों के दफ्तर यहीं हैं, लेकिन वर्षों से खराब पड़े शौचालयों की मरम्मत के लिए न तो बजट स्वीकृत हुआ और न ही जिम्मेदार अफसरों ने संज्ञान लिया।
महिला कर्मचारियों की स्थिति और भी दयनीय
विकास भवन में तैनात एक महिला कर्मचारी ने बताया,
“हम दो साल से शौचालय की मरम्मत के लिए अधिकारियों से गुहार लगा रहे हैं। कई बार सीडीओ से लिखित और मौखिक शिकायत की, लेकिन आज तक कोई कार्रवाई नहीं हुई।”
महिला कर्मचारियों को विशेष रूप से शौचालय की अनुपलब्धता से भारी असुविधा का सामना करना पड़ रहा है।
अफसरों की लापरवाही से स्वच्छता को लग रहा ग्रहण
जिम्मेदार अधिकारी विकास भवन की दुर्दशा को लेकर बिलकुल बेपरवाह हैं। स्वच्छता मिशन की बात करने वाले अफसर खुद अपने ही दफ्तर में गंदगी की अनदेखी कर रहे हैं। विकास भवन में साफ-सफाई और शौचालय जैसी प्राथमिक ज़रूरतों की अनदेखी ने पूरे प्रशासनिक तंत्र की गंभीरता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
तीनों मंजिलों पर आवारा कुत्तों का कब्जा
विकास भवन में आवारा कुत्तों ने हर मंजिल पर डेरा जमा रखा है। ये कुत्ते अक्सर गलियारों और विभागों के सामने शौच कर देते हैं, जिससे बदबू और गंदगी का माहौल बना रहता है। कई बार फरियादी या कर्मचारी इन गंदगी में पैर रख बैठते हैं और पूरा कार्यालय गंदा हो जाता है।
विकास भवन में गंदगी से भरे बदबूदार शौचालय का दृश्य।



