लखनऊ

उत्तर प्रदेश में ड्रोन क्रांति

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने किया अत्याधुनिक ड्रोन लैब का उद्घाटन

लखनऊ, 20 अगस्त 2025: उत्तर प्रदेश ने तकनीकी नवाचार और अपराध जांच में एक और मील का पत्थर हासिल किया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लखनऊ में एक अत्याधुनिक ड्रोन लैब का उद्घाटन किया, जिसमें नैनो ड्रोन से लेकर 40 किलोग्राम वजन उठाने की क्षमता वाले ड्रोन तक शामिल हैं। यह लैब उत्तर प्रदेश पुलिस और अन्य क्षेत्रों में ड्रोन तकनीक के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए स्थापित की गई है, जो राज्य को तकनीक-आधारित शासन और विकास की दिशा में अग्रणी बनाएगी।

लैब की विशेषताएं : यह ड्रोन लैब, उत्तर प्रदेश स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ फोरेंसिक साइंस (UPSIFS), लखनऊ में स्थापित की गई है। इसका उद्देश्य अपराध स्थलों की हाई-रेजोल्यूशन मैपिंग, साक्ष्य संग्रह, और रीयल-टाइम मॉनिटरिंग जैसे कार्यों में ड्रोन तकनीक का उपयोग करना है। इस लैब में शामिल ड्रोन निम्नलिखित कार्यों में सक्षम हैं:

.अपराध जांच: हत्या, डकैती, और दंगों जैसी घटनाओं में त्वरित और सटीक डेटा संग्रह।

.आपदा प्रबंधन: प्राकृतिक आपदाओं में खोज, बचाव, और राहत कार्यों में सहायता।

.कृषि और स्वास्थ्य: किसान ड्रोन के माध्यम से तरल उर्वरक छिड़काव और चिकित्सा आपूर्ति की डिलीवरी।

.डिजिटल फोरेंसिक विश्लेषण: ड्रोन से प्राप्त डेटा का गहन अध्ययन, जिससे अपराधियों तक पहुंचने की प्रक्रिया तेज होगी।

उद्घाटन समारोह में बोलते हुए, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा, “यह ड्रोन लैब उत्तर प्रदेश को तकनीक-आधारित पुलिसिंग और शासन में अग्रणी बनाएगा। नैनो ड्रोन से लेकर भारी पेलोड क्षमता वाले ड्रोन तक, यह सुविधा अपराध नियंत्रण, आपदा प्रबंधन, और विकास कार्यों में क्रांतिकारी बदलाव लाएगी।” उन्होंने यह भी जोड़ा कि यह पहल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आत्मनिर्भर भारत और डिजिटल इंडिया के दृष्टिकोण के अनुरूप है। रोबोटिक्स और ड्रोन प्रौद्योगिकी विशेषज्ञ मिलिंद राज, जिन्हें ‘भारत के ड्रोन मैन’ के रूप में जाना जाता है, ने इस लैब की संकल्पना और स्थापना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनके अनुसार, “यह लैब ड्रोन के फोरेंसिक पोस्टमॉर्टम और गैर-कानूनी गतिविधियों में उनके उपयोग को समझने में मदद करेगी।”

यह ड्रोन लैब न केवल कानून-व्यवस्था को मजबूत करेगा, बल्कि ड्रोन तकनीक से संबंधित क्षेत्रों में रोजगार सृजन को भी बढ़ावा देगा। ड्रोन पायलट, इंजीनियर, डेटा एनालिस्ट, और मेंटेनेंस विशेषज्ञ जैसे करियर अवसर युवाओं के लिए उपलब्ध होंगे। विशेषज्ञों का अनुमान है कि ड्रोन बाजार की अर्थव्यवस्था 2030 तक 2.5 ट्रिलियन तक पहुंच सकती है, जिसका लाभ उत्तर प्रदेश को मिलेगा। यह ड्रोन लैब उत्तर प्रदेश को ड्रोन तकनीक में देश का नेतृत्व प्रदान करने की दिशा में एक और कदम है। इससे पहले, राज्य ने भारत की पहली ड्रोन फोरेंसिक लैब की स्थापना की थी, जो अपराध जांच में तकनीक का उपयोग करने में मील का पत्थर साबित हुई है। अन्य राज्य भी अब इस मॉडल को अपनाने की दिशा में कदम उठा रहे हैं।

 

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