मथुरा

सरकारी अस्पतालों में डॉक्टर नहीं, कैसे हो मरीजों का इलाज

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो
मथुरा। प्रदेश सरकार जनता को सस्ता और सुलभ इलाज कराने के दावे भले ही करती हो, लेकिन स्थिति इससे उलट है। महर्षि दयानंद सरस्वती जिला अस्पताल और महिला अस्पताल पिछले कई वर्षों से चिकित्सकों की कमी से जूझ रहा है, लेकिन अभी तक इनकी पूर्ति नहीं हुई है। इसका खामियाजा मरीजों को उठाना पड़ रहा है। तीमारदार भी मरीज को दिखाने के लिए भटकते हैं। प्रदेश सरकार सरकारी अस्पतालों में मरीजों की संख्या बढ़ाने पर भरपूर जोर दे रही है। करोड़ों रुपये की बिल्डिंग और अस्पतालों में चिकित्सकीय संसाधन भी उपलब्ध कराए गए हैं, ताकि मरीजों को प्राइवेट अस्पताल में न जाना पड़े, लेकिन चिकित्सकों की कमी को दूर करने की ओर सरकार के नुमाइंदों का ध्यान नहीं है। अस्पतालों में असाध्य रोगों के विशेषज्ञ की कमी के कारण मरीजों को प्राइवेट हॉस्पिटलों की ओर रुख करना पड़ रहा है।
जिला अस्पताल में माइक्रोबायोलॉजिस्ट, रेडियोलॉजिस्ट, फिजिशियन, हृदय रोग, मनोचिकित्सक के पद वर्षों से खाली पड़े हैं। एंथेसिया के एक चिकित्सक से कार्य चलाया जा रहा है, जबकि रेडियोलॉजिस्ट के पद पर सीएमओ कार्यालय से अटैचमेंट में चिकित्सक से कार्य कराया रहा है।
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