मथुरा

मथुरा जिला महिला अस्पताल में बनेगा केएमसी वार्ड

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो
मथुरा। महिला जिला अस्पताल में जल्द ही केएमसी (कंगारू मदर केयर) वार्ड की स्थापना होगी। 17 बेड के इस वार्ड में समय से पहले जन्म लेने वाले नवजात और कमजोर नवजातों की विशेष देखभाल की जाएगी। वार्ड निर्माण के लिए सीएमएस ने जिलाधिकारी के माध्यम से स्वास्थ्य विभाग मुख्यालय प्रस्ताव भेज दिया है। महिला जिला अस्पताल में प्रतिमाह 300 के करीब महिलाओं का प्रसव होता है। इसमें साधारण प्रसव के साथ ही ऑपरेशन से भी नवजातों का जन्म होता है। प्रतिमाह करीब एक सैकड़ा केस ऐसे सामने आते हैं, जिनमें समय से पहले अथवा कम वजन के नवजातों का जन्म होता है। वर्तमान में उन्हें एसएनसीयू वार्ड में रखा जाता है, जहां उनकी देखभाल होती है। इसी तरह के बच्चों के लिए महिला जिला अस्पताल में केएमसी (कंगारू मदर केयर) वार्ड बनना है। वार्ड में जन्म से पहले जन्मे और कम वजन वाले शिशुओं की विशेष देखभाल की जाएगी। यहां माताओं को अपने नवजात शिशुओं के साथ त्वचा से त्वचा का संपर्क बनाए रखने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। इससे शिशु को गर्माहट, बेहतर स्तनपान और शारीरिक स्थिरता मिलती है और माता और शिशु के बीच एक मजबूत बंधन बनता है। महिला जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. अनिल कुमार कपर्वाल ने बताया कि 17 बैड के वार्ड की स्थापना होगी। अस्पताल में केएमसी वार्ड के निर्माण के लिए जिलाधिकारी सीपी सिंह भी प्रयासरत हैं। उन्होंने वार्ड के लिए प्रस्ताव बनाकर मुख्यालय भेजा है। जल्द ही इसकी स्वीकृति मिलने की उम्मीद है, क्योंकि जिलाधिकारी सीपी सिंह वार्ड निर्माण में व्यक्तिगत रूप से दिलचस्पी ले रहे हैं। शिशु को मां की छाती पर लिटाया जाता है, इससे शिशु को मां की गर्माहट और सुरक्षा मिलती है। केएमसी में शिशु को मां का दूध पिलाने को बढ़ावा मिलता है। इससे शिशु का वजन बढ़ता है। यह एक सिद्ध, जीवन रक्षक नवजात शिशु देखभाल पद्धति है। शिशु को संक्रमण कम होता है और शारीरिक रूप से स्थिर होते हैं। उनका वजन तेजी से बढ़ता है। वार्ड में महिलाओं को बच्चों की उचित देखभाल का प्रशिक्षण भी दिया जाता है। यूनिसेफ जैसी संस्थाओं से महिलाओं को विशेष केएमसी किट प्रदान की जाती है। इसमें शिशु की स्थिति देखने के दर्पण, मापन का कप, थर्मामीटर, हैंड सेनिटाइजर और शिशु व मां के लिए कपड़े होते हैं।
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