छिंदवाड़ा(कुसमैली)मंडी का काला खेल
इंस्पेक्टर देवेंद्र धुर्वे पर अरबों की संपत्ति का खुलासा

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो
छिंदवाड़ा। किसानों की सुरक्षा और पारदर्शी व्यापार व्यवस्था के लिए बनी मंडियां भ्रष्टाचार के दलदल में फंस चुकी हैं। छिंदवाड़ा की कुसमेली कृषि उपज मंडी इसका बड़ा उदाहरण बन गई है, जहां मंडी इंस्पेक्टर देवेंद्र धुर्वे पर फर्जी पर्चियां, अवैध वसूली और जमीन कब्जे के जरिए अरबों की काली कमाई के गंभीर आरोप लगे हैं।
मात्र 50–60 हजार रुपये वेतन पाने वाले धुर्वे के नाम आलीशान हवेलियों, लग्ज़री गाड़ियों, बीस से अधिक प्लॉट और करीब 15 एकड़ जमीन होने की बात सामने आई है। किसानों का आरोप है कि मंडी में आधी से ज्यादा पर्चियां फर्जी बनाई जाती हैं और प्रति क्विंटल वसूली का पूरा नेटवर्क खड़ा किया गया है। रोज़ाना लाखों की वसूली सीधे धुर्वे के सिस्टम में जाती है।
आदिवासी समुदाय पर शोषण के आरोप और भी गंभीर हैं—पहले जरूरतमंद आदिवासियों से उधार लेकर, फिर उन्हें कर्ज जाल में फंसाकर उनकी जमीनें औने-पौने दाम में खरीद लेना। किसानों का कहना है कि यह सिर्फ भ्रष्टाचार की कहानी नहीं, बल्कि उनके अधिकारों और जीवन पर सीधा हमला है।
लोकायुक्त की जांच जारी है और आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) के हस्तक्षेप की मांग तेज हो रही है। सवाल यह भी उठ रहा है कि बार-बार ट्रांसफर के बावजूद धुर्वे की छिंदवाड़ा मंडी में वापसी किसकी शह पर होती रही?
किसानों और सामाजिक संगठनों ने तत्काल गिरफ्तारी और संपत्ति जब्ती की मांग की है। अब पूरा छिंदवाड़ा टकटकी लगाए है कि प्रशासन इस मंडी साम्राज्य को ध्वस्त करने का साहस दिखाता है या फिर मामला हमेशा की तरह दबा दिया जाएगा।




