सिंगरौली
एनसीएल की अमलोरी, झींगुरदह और खड़िया परियोजनाओं में डीजल घोटाला
कलिंगा कमर्शियल कारपोरेशन लिमिटेड पर पेसो (PESO) लाइसेंस के दुरुपयोग और करोड़ों की राजस्व हानि का आरोप

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो।
सिंगरौली। केंद्रीय सतर्कता आयोग (CVC) को भेजी गई एक गंभीर शिकायत ने नॉर्दर्न कोल फील्ड्स लिमिटेड (NCL) की खड़िया, अमलोरी और झींगुरदा परियोजनाओं में डीजल से जुड़े बड़े घोटाले की जाँच हेतु पत्रक भेजा गया है। शिकायत में आरोप है कलिंगा आउटसोर्सिंग कंपनी (KCCL) ने PESO (Petroleum and Explosives Safety Organization) लाइसेंस का दुरुपयोग कर अवैध रूप से डीजल की खपत की है, जिससे न केवल उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश सरकार को करोड़ों रुपये का राजस्व नुकसान हुआ, बल्कि खदानों में काम कर रहे मजदूरों और स्थानीय आबादी की सुरक्षा भी खतरे में पड़ गई।
शिकायत के मुख्य बिंदु :
अमलोरी लाइसेंस से झींगुरदा और खड़िया में डीजल खपत
• कंपनी ने वर्षों तक अमलोरी परियोजना के लिए मिले PESO लाइसेंस के आधार पर झींगुरदा परियोजना में डीजल खपत की।
• वर्तमान में कंपनी खड़िया परियोजना (उत्तर प्रदेश) में भी अमलोरी/झींगुरदा के PESO लाइसेंस का गलत इस्तेमाल कर रही है।
• इसका सीधा असर दोनों राज्यों की कर वसूली और राजस्व पर पड़ा है।
टैक्स और जीएसटी में गड़बड़ी :-
• अमलोरी और झींगुरदा परियोजनाएँ मध्य प्रदेश में हैं, जबकि खड़िया परियोजना उत्तर प्रदेश में स्थित है।
• कंपनी ने डीजल की टैक्स एंट्री मध्य प्रदेश में की, जबकि वास्तविक खपत उत्तर प्रदेश में की गई।
• इससे उत्तर प्रदेश सरकार को प्रतिमाह लाखों रुपये का राजस्व नुकसान हुआ।
अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल :-
• शिकायत में आरोप है कि एनसीएल के बैरियर और सुरक्षा अधिकारी केवल सामान्य वाहन कागजात देखकर टैंकरों को खदान में प्रवेश की अनुमति दे रहे हैं।
• डिजिटल इनवॉइस, जीएसटी चालान, ई-वेबिल और वेटब्रिज रसीदों की सत्यापन प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया।
• इस लापरवाही के कारण अवैध डीजल खपत संभव हो पाई।
• मामले में एनसीएल अधिकारियों की मिलीभगत और प्रक्रियागत चूक की आशंका जताई गई है।
सुरक्षा पर खतरा :-
• बिना वैध PESO लाइसेंस और अनुमोदित भंडारण के डीजल खपत से आगजनी और विस्फोट का खतरा बढ़ गया है।
• खदानों में काम कर रहे मजदूरों व आसपास के गांवों की सुरक्षा गंभीर रूप से प्रभावित हुई है।
शिकायतकर्ता राघवेंद्र प्रताप सिंह की मांग :-
• खड़िया, अमलोरी और झींगुरदह परियोजनाओं के पिछले वर्षों का फोरेंसिक ऑडिट कराया जाए।
• बैरियर एंट्री लॉग, टैंकर नंबर, सीसीटीवी फुटेज, जीएसटी और इनवॉइस की जांच की जाए।
• कंपनी के खिलाफ कठोर दंडात्मक कार्रवाई हो और आवश्यकता पड़ने पर PESO लाइसेंस निलंबित/रद्द किया जाए।
• एनसीएल अधिकारियों की मिलीभगत या लापरवाही सामने आने पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए।
• राजस्व चोरी को लेकर उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश दोनों राज्य कर विभागों को जांच में शामिल किया जाए।
अब देखना होगा कि केंद्रीय सतर्कता आयोग इस गंभीर प्रकरण पर कितनी सख्त कार्रवाई करता है।



