गोड्डा

राजेन्द्र बाबू ने राेचक अंदाज से हिंदी साहित्य की छाप छोड़ी

-- हिंदी दिवस पर साहित्यिक गोष्ठी का आयोजन

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो
 गोड्डा : हिंदी दिवस के अवसर पर सेवा निवृत्त शिक्षक दिलीप कुमार झा की अध्यक्षता में महेशपुर काली मंदिर परिसर में साहित्यिक गोष्ठी का आयोजन किया गया। इस दौरान हिंदी साहित्य के विकास में अहम योगदान पर विचार व्यक्त किए गए। मौके पर सेवा निवृत्त शिक्षक दिलीप कुमार झा ने कहा कि आजादी के बाद हिन्दी साहित्य को रोचक अंदाज में जन-जन तक पहुचाने में शिक्षाविद स्व.राजेन्द्र बाबू की भूमिका अहम रही है। शिक्षक राजेन्द्र नारायण सिंह हिंदी साहित्य के अमूल्य धरोहर थे। राष्टकवि दिनकर, सूर्यकांत त्रिपाठी निराला, हरिबंश राय बच्चन, महादेवी वर्मा की रचनाओं पर उन्होंने शोध भी किया। उनकी कविता व नाटक की पांडूलिपियों का शीघ्र ही प्रकाशन हो जाएगा। उनकी कविता संग्रह धुआं का शीघ्र ही लोकार्पण होने वाला है। उनको अभिनय से बड़ा ही लगाव था। शैक्षणिक कार्यकाल में वे अक्सर छात्र-छात्राओं से एकांकी , वाद विवाद प्रतियोगिता, भाषण प्रतियोगिता का अक्सर आयोजन कराते रहते थे। इससे छात्र-छात्राओं में अभिव्यक्ति का अभ्यास हो जाता था। वे सभी मंचों पर आसानी से अपने विचार व्यक्त करने में समर्थ साबित होते थे।
आजादी के बाद संतालपरगना स्तरीय उच्च विद्यालय महेशपुर में साहित्यकार व कवि शुद्ध्देव झा उत्पल की प्रेरणा से उन्होंने बतौर हिंदी शिक्षक पदस्थापित हुए। उन्होंने आजादी के दौर के उपरांत अपनी लेखनी व लेखकों की ओजस्वी आलेखों से आम लोगों को प्रेरित किया। उन्होंने हिंदी साहित्य के प्रचार- प्रसाद की दिशा में अनेक कार्य किये। उनकी पांडूलिपी आज भी संग्रहित हैं। उनकी प्रेरणा से उनके पुत्र डा. शिशिर कुमार उनकी ख्याति को बढ़ाने में सराहनीय योगदान दे रहे हैं। कहा कि जिले में अनेक साहित्यकारों ने अपनी रचना से गोड्डा का मान बढ़ाया है। इन कवियों में पूर्व विधायक बुद्धिनाथ झा कैरव, परमार जी आदि शामिल थे। इसके अलावा अजय कुमार चौधरी, नवीन कुमार सहित अनेक बुद्धिजीवियों ने आदि ने भी विचार व्यक्त किए।
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