आचार्य श्री 108 नयन सागर जी महाराज के प्रवचन एवं शिलान्यास समारोह

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो
बड़ौत/बागपत : आज कौशल भवन सभागार में प्रवचन करते हुए आचार्य श्री 108 नयन सागर जी महाराज ने कहा कि जब भगवान ऋषभदेव मां मरूदेवी के गर्भ में आने वाले थे, तो नगर को देवताओं ने स्वयं सजाया था और रत्नों की वर्षा हुई थी। भगवान ऋषभदेव का जन्म चैत्र वदी नवमी के दिन हुआ था।
आचार्य श्री ने कहा कि आदेश देने से पतन होता है, उपदेश देने से कल्याण होता है। उन्होंने कहा कि भगवान की भक्ति के लिए हमें स्वयं को चुनना चाहिए, दूसरों को नहीं। शीला रखने का अवसर जीवन में कभी-कभी आता है और इसका लाभ केवल अत्यंत पुण्यवान व्यक्ति ही प्राप्त कर पाते हैं।
उन्होंने काव्यात्मक अंदाज़ में आह्वान किया –
“बड़ौत करता है यह आह्वान,
ठठ से कर मंदिर निर्माण,
शीला की जगह लगा दे प्राण,
बिठा वहां आदिनाथ भगवान।”
आचार्य श्री ने बताया कि यहां 43×118 फुट आकार का विशाल हाल मंदिर निर्मित होगा।
शिलान्यास समारोह
प्रातः 8 बजे श्री 1008 ऋषभदेव चैत्यालय में अस्थायी वेदिका शिलान्यास समारोह का आयोजन हुआ, जिसे प्रतिष्ठाचार्य डॉ. अशोक शास्त्री ने संपन्न कराया।
- मुख्य शिलान्यासकर्ता : राकेश कुमार जैन (काके भाई), रजत जैन
- मुख्य वेदी प्रदाता बनने का सौभाग्य : राजेश जैन, राजबहादुर जैन (कढ़ाव वाले) को प्राप्त हुआ।
इस अवसर पर सैकड़ों श्रद्धालु उपस्थित रहे। सुबह से ही नगर में उत्सव जैसा माहौल रहा। महिलाएं व पुरुष पारंपरिक परिधानों में सजधजकर अतिथि भवन परिसर में एकत्र हुए।
आगामी कार्यक्रम
- 27 सितंबर 2025 : आस्था जैन टीकमगढ़ द्वारा “एक शाम निर्मल सागर महाराज के नाम” भजन संध्या, सायं 7 बजे, अतिथि भवन।
- 28 सितंबर 2025 : आचार्य श्री 108 नयन सागर जी मुनिराज का 39वां वैराग्य दिवस, प्रातः 8 बजे, अतिथि भवन परिसर में बड़े हर्षोल्लास से मनाया जाएगा।



