बेतुल
बैतूल नपा बैतूल में टेंट-लाइटिंग में घोटाले कर करोड़ों की हेराफेरी का गंभीर आरोप
फर्जी बिलों से पिछले 15 वर्षों में करोड़ों की निकासी का दावा, जांच शुरू न होने से गहराया संदेह

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो
बैतूल। नगर पालिका परिषद बैतूल में लंबे समय से टेंट हाउस और लाइटिंग के नाम पर फर्जी बिलों के ज़रिए करोड़ों रुपये के भुगतान का गंभीर मामला उजागर हुआ है। राष्ट्रीय मानवाधिकार एवं आर टी आई जागरूकता संगठन भारत के जिला संगठन मंत्री कन्हैयालाल चौकीकर ने इस संदर्भ में जिला कलेक्टर से शिकायत की है, जिसमें नगर पालिका में बीते 10 से 15 वर्षों के दौरान किए गए फर्जी भुगतान का गंभीर खुलासा किया गया है। चौकीकर ने बताया कि उन्होंने आरटीआई के माध्यम से भी कई जानकारियाँ मांगीं, लेकिन तथ्यों को दबा दिया गया और किसी भी स्तर पर जांच प्रारंभ नहीं की गई।
कन्हैयालाल चौकीकर ने अपने शिकायती आवेदन में बताया है कि प्रतिवर्ष रामलीला आयोजन में 30×75 या 30×90 आकार का टेंट लगाया जाता है, लेकिन भुगतान के लिए जानबूझकर 30×150 के टेंट का बिल प्रस्तुत कर राशि अधिक निकाली जाती है। इसी प्रकार कार्यक्रम की वास्तविक अवधि केवल 10 से 12 दिन होती है, किंतु बिल 15 दिन का बनाकर भुगतान किया जाता है। यह सिलसिला वर्षों से चला आ रहा है, जिससे करोड़ों रुपये की हेराफेरी हुई है।
शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि गणेश विसर्जन और दुर्गा विसर्जन के लिए केवल दो दिन के आदेश जारी होते हैं, लेकिन बिल तीन दिन का बनाकर राशि निकाली जाती है। यही नहीं, 15 अगस्त और 26 जनवरी जैसे राष्ट्रीय पर्वों पर भी टेंट और लाइटिंग के खर्चों में घोटाला किया गया है। एक ही टेंट हाउस के नाम पर लाखों रुपये के बिल हर वर्ष नगर पालिका में लगाए गए, जिससे साफ जाहिर होता है कि यह सुनियोजित भ्रष्टाचार है। कन्हैयालाल चौकीकर ने जिला प्रशासन से मांग की है कि नगर पालिका बैतूल के पिछले एक दशक के समस्त टेंट-लाइटिंग संबंधी बिलों की उच्च स्तरीय जांच कराई जाए ताकि करोड़ों रुपये की हेराफेरी के जिम्मेदारों को चिन्हित कर सख्त कार्रवाई की जा सके। कन्हैयालाल का कहना है कि नगरपालिका निविदा में आयकर प्रमाण पत्र मांगते है लेकिन जीएसटी चुकता प्रमाण पत्र नहीं मांगते हैं।



