बिना मान्यता के चल रहे पैरामेडिकल इंस्टीट्यूट पर हुई कार्रवाई
सीएमओ और डीआईओएस ने छात्रों की समस्याएं सुनीं

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो
अमेठी। बिना मान्यता के संचालित हो रहे अमेठी इंस्टीट्यूट ऑफ पैरामेडिकल एंड साइंसेज पर कार्रवाई के बाद मंगलवार को संस्थान परिसर में छात्रों की समस्याओं की सुनवाई की गई। इस दौरान मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. अंशुमान सिंह और जिला विद्यालय निरीक्षक राजेश द्विवेदी ने स्वयं उपस्थित होकर छात्र-छात्राओं की शिकायतें सुनीं।
जानकारी के अनुसार, संस्थान में फर्जी तरीके से दाखिला लेकर पढ़ाई कर रहे लगभग 50 छात्र-छात्राओं ने अधिकारियों को लिखित शिकायतें सौंपीं। छात्रों ने बताया कि उनसे भारी-भरकम शुल्क वसूला गया था। अधिकारियों ने उन्हें आश्वासन दिया कि उनकी पढ़ाई और भविष्य सुरक्षित रखने के लिए ठोस कदम उठाए जाएंगे।
छात्रों ने अपनी शिकायतों में विभिन्न पाठ्यक्रमों के लिए ली गई फीस का विवरण दिया। दीक्षा कश्यप ने ए.एन.एम. प्रशिक्षण के लिए 95,000 रुपये, क्षमा शुक्ला ने 40,000 रुपये और शिवानी ने भी ए.एन.एम. के लिए 95,000 रुपये वसूले जाने की शिकायत की। गुड़िया प्रजापति ने 45,500 रुपये, रंजना पाल ने ए.एन.एम. प्रशिक्षण के लिए 1 लाख रुपये और सोनम ने 90,000 रुपये फीस देने की बात कही। शिवांश शुक्ल ने ऑप्टोमेट्री कोर्स के लिए 45,500 रुपये और प्रिया शुक्ला ने ए.एन.एम. कोर्स के लिए 35,500 रुपये जमा करने की जानकारी दी।
सीएमओ डॉ. अंशुमान सिंह ने बताया कि इस संस्थान के खिलाफ 15 दिन पहले ही मुकदमा दर्ज हो चुका है। उन्होंने कहा, “यहां पर फर्जी तरीके से बरेली, नोएडा, मथुरा और जौनपुर के संस्थानों के नाम पर रजिस्ट्रेशन कराए जाते थे और बच्चों से पैसा लिया जाता था। लेकिन उन संस्थाओं को पैसा नहीं दिया गया।” उन्होंने यह भी बताया कि उन्होंने तीन संबंधित जगहों पर बात की है और सभी ने ऑफिस आकर पूरी जानकारी देने को कहा है। सभी शिकायतों के आधार पर नोटिस जारी किया जाएगा। संचालक के खिलाफ रिकवरी के लिए पहले ही मुकदमा दर्ज हो चुका है और आगे की कानूनी कार्रवाई जारी है।
अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के जिलाप्रमुख डॉ धनंजय सिंह ने कहा कि छात्र हित सर्वोपरि है। छात्रों के हित के लिए अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद सबसे आगे रहेगा। जब तक दोषियों के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो जाती। तब तक संगठन इन छात्रों के साथ खड़ा रहेगा।
वहीं अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के जिला संगठन मंत्री युवराज ने कहा कि जब तक सभी विद्यार्थियों को न्याय नहीं मिलेगा तब तक अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद छात्रों के हित के लिए लड़ता रहेगा।

