गाजियाबाद
गोवर्धन पूजा पर सरकार के आदेश की लोनी में उड़ी धज्जियां,
लोनी गौशाला में नहीं दिखाई दी समारोह की झलक

गौवंश संरक्षण के सरकार के आदेश धरे के धरे रह गए
लोनी अंकुर बिहार गौशाला में गोवर्धन पूजा समारोह पूर्वक न मनाए जाने से उठे सवाल
नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो
लोनी (गाजियाबाद)। प्रदेश सरकार के स्पष्ट शासनादेश के बावजूद लोनी अंकुर बिहार स्थित गौशाला में गोवर्धन पूजा इस वर्ष मात्र औपचारिकता बनकर रह गई। शासनादेश के अनुसार प्रदेश की सभी गौशालाओं और गो-आश्रय स्थलों पर गोवर्धन पूजा समारोहपूर्वक मनाए जाने के निर्देश दिए गए थे, परंतु नगर पालिका परिषद लोनी के अधिशासी अधिकारी के.के. मिश्र ने सरकार के आदेश को गंभीरता से नहीं लिया।
बताया गया कि अधिशासी अधिकारी ने सपरिवार गौशाला पहुंचे और गौमाता को गुड़,आटा व चोकर खिलाकर पूजन किया, परंतु इस कार्यक्रम में पार्षद, चेयरमैन, विधायक, सांसद और क्षेत्र के गणमान्य नागरिकों में से कोई भी उपस्थित नहीं था। यह स्पष्ट नहीं हो सका कि इन चुने हुए जनप्रतिनिधियों को कार्यक्रम की जानकारी दी भी गई थी या नहीं।
गौशाला में स्वच्छ पानी, प्रकाश व्यवस्था और हरे चारे की स्थिति भी संतोषजनक नहीं पाई गई। गौवंश के भरण-पोषण की दशा देखकर स्थानीय नागरिकों ने निराशा व्यक्त की। शासन के निर्देशानुसार राजमार्गों और नगर क्षेत्र से आवारा गौवंश को पकड़कर गौशाला में संरक्षित करने की व्यवस्था का भी पालन होता दिखाई नहीं दिया।
इसके अलावा, शासन द्वारा सुझाई गई गौमाता से जुड़े सांस्कृतिक प्रयास — जैसे गोबर से दीये, मूर्तियाँ और पर्यावरणीय संदेशों का प्रसार प्रचार— कहीं नज़र नहीं आए। कार्यक्रम केवल अधिशासी अधिकारी द्वारा सपरिवार औपचारिक पूजा और फोटो सत्र तक सीमित रहा।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि शासनादेशों का पालन इस तरह से केवल खानापूर्ति बनकर रह जाएगा, तो सरकार की मंशा — गौसंरक्षण और जनजागरूकता — कैसे साकार होगी?
अब देखना यह है कि शासनादेश की अवहेलना करने वाले अधिकारियों पर कार्यवाही अमल में लाई जाती है या फिर हमेशा की तरह यह मामला औपचारिकता की परतों में दबकर रह जाएगा।




