असम

असम में मशहूर गायक जुबिन गर्ग की मौत पर बीजेपी की न्याय यात्रा पर जनता और विपक्ष का कड़ा विरोध। 

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो

असम के मशहूर गायक, सुपरस्टार जुबिन गर्ग की सिंगापुर में संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत के बाद असम में न्याय की मांग जोर पकड़ती जा रही है। बीजेपी द्वारा 22 अक्टूबर से शुरू की गई जुबिन गर्ग की न्याय यात्रा को लेकर पूरे राज्य में राजनीतिक और सार्वजनिक दोनों स्तरों पर तीव्र संवेदनशीलता देखी जा रही है। हालांकि बीजेपी ने इस न्याय यात्रा को लेकर बड़ी सक्रियता दिखाई, लेकिन राज्य के जनसामान्य और विपक्षी दलों ने इस कदम की कड़ी आलोचना की है। कई लोग इस आंदोलन को राजनीतिक स्वार्थ साधने वाला कदम मान रहे हैं, जो असम की सामाजिक शांति को प्रभावित कर रहा है। जुबिन गर्ग के असमय निधन का जांच करने वाले मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा नेतृत्वकारी बीजेपी सरकार से ही अब बीजेपी वाले सड़क पर प्रदर्शन करते हुए न्याय की मांग कर रहे हैं जिसको आम जनता एक राजनीतिक नौटंकी बता रहे हैं।  विपक्षी दलों ने आरोप लगाया है कि बीजेपी सरकार मामले को दबाने और अपने राजनीतिक कदमों को चालू रखने के मद्देनजर इस यात्रा को राजनीतिक हथियार बना रही है। हाल ही में, असम प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गौरव गोगोई समेत कई विपक्षी नेताओं ने न्याय की मांग को लेकर कैंडल मार्च और विरोध प्रदर्शन किए, जिसमें हजारों लोगों ने हिस्सा लिया। उन्होंने कहा कि जुबिन गर्ग की मौत एक हादसा नहीं बल्कि हत्या की आशंका है, और इस मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। उन्होंने सीबीआई जांच की मांग भी उभारी है। हाल में जुबिन गर्ग के मामले में पांच आरोपियों की गिरफ्तारी हुई, जिनमें उनके मैनेजर और कार्यक्रम आयोजक शामिल हैं। इस गिरफ्तारी के बाद बक्सा जेल के बाहर प्रदर्शनकारियों ने काफिले पर पथराव और पुलिस से भिड़न्त की, जिससे हालात तनावपूर्ण हो गए। इसके चलते प्रशासन ने इलाके में कड़ी सुरक्षा और भीड़ नियंत्रण के लिए कड़े आदेश जारी किए हैं। मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा शर्मा ने इस मामले पर टिप्पणी करते हुए कहा कि इस तरह के आंदोलन सत्ता परिवर्तन का एक हिस्सा हैं। उन्होंने जनता से संयम बरतने और न्याय प्रक्रिया पर भरोसा रखने की अपील की है। हालांकि, राज्य में जुबिन गर्ग की मौत से उपजा राजनीतिक और सामाजिक विवाद सीएए के बाद के सबसे बड़े आंदोलन में से एक बन चुका है। असम में जुबिन गर्ग की मौत ने न केवल उनके प्रशंसकों को गहरा सदमा दिया है, बल्कि सरकार के प्रति जनता के भरोसे को भी चुनौती दी है। अब न्याय की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच की मांग पूरे जोर-शोर से उठ रही है, जिसका प्रभाव आगामी विधानसभा चुनावों में भी देखने को मिल सकता है। इस विवाद की गूंज सोशल मीडिया से लेकर असम की गलियों तक व्याप्त है, जहां न्याय की मांग के साथ-साथ राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप जारी हैं। असम की राजनीति इस मुद्दे को लेकर एक नई दिशा में बढ़ रही है, जिसमें जुबिन गर्ग की मौत एक प्रमुख जन आंदोलित विषय बन चुकी है।

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