असम
असम मंत्रिमंडल के फैसले
औद्योगिक विस्तार, भूमि अधिकार, शिक्षक नियमितीकरण और जातीय सशक्तिकरण को मिली नई दिशा।

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो
असम सरकार ने समावेशी विकास और प्रशासनिक सुधार को बढ़ावा देने की दिशा में कई अहम निर्णय लिए हैं। असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की अध्यक्षता में गुरुवार को हुई राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में औद्योगिक विस्तार, भूमिहीन मूलनिवासी परिवारों को भूमि अधिकार, शिक्षकों के कल्याण तथा स्वदेशी समुदायों के सशक्तिकरण के लिए कई प्रस्तावों को स्वीकृति दी गई।औद्योगिक क्षेत्र को मजबूती प्रदान करते हुए, कैबिनेट ने असम पेट्रोकेमिकल्स लिमिटेड की 500 टीपीडी मेथनॉल व 200 टीपीडी फॉर्मेलिन परियोजना की लागत बढ़ाकर 2,267.22 करोड़ रुपये करने की मंजूरी दी। सरकार का मानना है कि इस कदम से औद्योगिक उत्पादन में वृद्धि होगी, नए रोजगार सृजित होंगे और राज्य की पेट्रोकेमिकल आधारभूत संरचना सुदृढ़ होगी। भूमिहीन मूलनिवासी परिवारों के अधिकारों की रक्षा हेतु मिशन बसुंधरा 2.0 के तहत 224 भूमि पट्टा आवंटन प्रस्तावों को मंत्रिमंडल ने स्वीकृति दी। राज्य सरकार का लक्ष्य है कि लंबे समय से लंबित भूमि विवादों का समाधान कर सभी समुदायों को भूमि संसाधनों तक समान अधिकार दिलाए जाएं। शिक्षा क्षेत्र में भी बड़ा कदम उठाते हुए मंत्रिमंडल ने असम प्राथमिक एवं माध्यमिक विद्यालय शिक्षक (पदस्थापन एवं स्थानांतरण विनियमन) (संशोधन) विधेयक, 2025 को मंजूरी दी। नए संशोधन से शिक्षकों के स्थानांतरण व नियमितीकरण की प्रक्रिया को सुव्यवस्थित किया जाएगा। इससे सर्व शिक्षा अभियान (SSA) के तहत कार्यरत करीब 12,000 संविदा शिक्षकों को नियमितीकरण का अवसर मिलेगा, जिससे नौकरी की सुरक्षा और प्रशासनिक दक्षता में सुधार होगा। जातीय सशक्तिकरण की दिशा में, सरकार ने मटक स्वायत्त परिषद (संशोधन) अध्यादेश, 2025 और मोरन स्वायत्त परिषद (संशोधन) अध्यादेश, 2025 को भी आगामी विधानसभा सत्र में पेश करने की मंजूरी दी। इन बदलावों से दोनों समुदायों को प्रशासनिक व विकासात्मक स्वायत्तता प्राप्त होगी।ऐतिहासिक दृष्टि से महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए, कैबिनेट ने 1983 के नेली नरसंहार पर तिवारी आयोग की रिपोर्ट को विधानसभा के अगले सत्र में प्रस्तुत करने का निर्णय लिया। यह रिपोर्ट असम के इतिहास के सबसे दर्दनाक अध्यायों में से एक पर नई रोशनी डालेगी। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा कि सरकार के ये फैसले राज्य में औद्योगिक विकास, सामाजिक न्याय और समावेशी शासन को नई गति देंगे और असम को आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ाएंगे।



