
चौकी प्रभारी की छवि पर लग रहा दाग, अवैध कारोबारियों की चांदी
नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो।
सिंगरौली : सिंगरौली जिले के बधौरा चौकी में पदस्थ आरक्षक इन दिनों सुर्खियों में है जो वर्तमान में चौकी में कारखास बन अवैध कार्यो को दे रहा बढ़ावा। बताया जा रहा है कि कारखास के पद का इस्तेमाल वह ऊपरी कमाई के साधन के रूप में कर रहा है। चौकी परिसर में ही चल रहे इस खेल की चर्चा अब धीरे-धीरे जनता से लेकर पुलिस महकमे तक पहुंच चुकी है। सूत्रों के अनुसार, आरक्षक पहले भी कई विवादों में घिर चुका है। शिकायतों के बावजूद उसके खिलाफ ठोस कार्रवाई नहीं हुई, बल्कि उसे चौकी में एक प्रभावशाली पद — कारखास — पर बनाए रखा गया है। यही वजह है कि अब यह पद साख के बजाय सवालों का प्रतीक बन गया है।
कारखास पद के नाम पर कथित वसूली का खेल
जानकारी मिली है कि चौकी क्षेत्र में आने वाले ट्रांसपोर्टर, ठेकेदार, खनन कारोबारी और शराब कारोबार से जुड़े लोगों से अनौपचारिक वसूली की जा रही है। सूत्रों के मुताबिक, किसी वाहन को चौकी क्षेत्र से गुजरने या रुकने के लिए अक्सर कारखास की “अनुमति” आवश्यक बताई जाती है। कई स्थानीय लोगों का कहना है कि जो व्यक्ति ‘सेटिंग’ में है, उसे कोई परेशानी नहीं होती, लेकिन जो इनकार करता है, उसे झूठे मामलों में फंसाने या चालान काटने का डर दिखाया जाता है।
विवादों में रहा इतिहास
बधौरा चौकी में पदस्थ कारखास का नाम पहले भी कई विवादित घटनाओं में जुड़ चुका है। पूर्व में अन्य थानों या चौकियों में तैनाती के दौरान भी उसके खिलाफ अभद्र व्यवहार, अनुशासनहीनता और अनुचित वसूली के आरोप लगे थे। बावजूद इसके उसे बधौरा चौकी में जिम्मेदार भूमिका में बनाए रखा गया है, जिससे पुलिस प्रशासन की कार्यशैली पर भी सवाल उठ रहे हैं।
चौकी प्रभारी की छवि पर असर
स्थानीय सूत्रों का कहना है कि कारखास के इस रवैये से चौकी प्रभारी की साख भी प्रभावित हो रही है। कारखास के नाम पर हो रहे कथित लेनदेन की वजह से चौकी का नाम बदनाम हो रहा है। कुछ लोग तो यह तक कह रहे हैं कि कारखास अपने “पद का प्रभाव” दिखाते हुए चौकी प्रभारी का नाम लेकर अवैध वसूली कर रहा है। इससे न सिर्फ जनता का भरोसा डगमगा रहा है, बल्कि ईमानदार अधिकारियों की छवि भी धूमिल हो रही है।
अवैध कारोबारियों में बना चर्चा का विषय
क्षेत्र में चल रहे अवैध बालू परिवहन, अवैध शराब बिक्री और ओवरलोड वाहनों के बीच अब कारखास का नाम खूब चर्चा में है। अवैध कारोबारियों में यह कहा जा रहा है कि “अगर सब ठीक रखना है तो कारखास से बात जरूरी है।” यह स्थिति इस बात का संकेत है कि चौकी स्तर पर ही अनुशासन की डोर कमजोर पड़ रही है।



