
नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो
लोनी गाजियाबाद : इंद्रापुरी क्षेत्र में सोमवार को एक अजीब नजारा देखने को मिला — आसमान में बादल नहीं, पर सड़क पर पानी जरूर था! दिल्ली-सहारनपुर राजमार्ग पर अचानक ऐसा लगा मानो बरसात ने बिना बुलाए ही दस्तक दे दी हो। कुछ ही मिनटों में सड़क तालाब में तब्दील हो गई और वाहनों की लंबी कतारें लग गईं।
विधायक जी के रोडे भी बह गए पानी में
याद कीजिए, अभी दस दिन पहले भाजपा के मीडिया प्रभारी ने सोशल मीडिया पर मुस्कराती हुई तस्वीरें डाली थीं — सड़क पर रोडे डल रहे थे, और कैप्शन था “विधायक जी ने राजमार्ग पर मरम्मत कार्य का शुभारंभ किया।”
लोगों ने भी चैन की सांस ली कि अब तो सड़क चमक उठेगी।
लेकिन, अगले ही दिन रोडे डालने वाले मजदूरों की तरह काम भी गायब हो गया। सड़क वहीं की वहीं रही, फर्क सिर्फ इतना कि अब उस पर कीचड़ और पानी की परतें भी चढ़ गई हैं — जैसे किसी ने “मरम्मत” के नाम पर प्रकृति को ठेका दे दिया हो।
जनता बोली – “काम शुरू हुआ, लेकिन कहाँ खत्म हुआ?”
स्थानीय लोगों ने तंज कसते हुए कहा,
> “हमने तो सोचा था विधायक जी सड़क बनवाएँगे, पर उन्होंने तो सड़क को स्विमिंग पूल बना दिया!”
कुछ लोगों ने कहा कि जनप्रतिनिधियों ने काम शुरू कराने के नाम पर अखबारों में सुर्खियाँ और सोशल मीडिया पर वाहवाही तो खूब बटोरी, लेकिन सड़क की हालत जस की तस है — या यूँ कहें, “जैसी थी वैसी से भी बदतर।”
“जनता को उम्मीदों का पानी” और सड़क पर “असली पानी”
जहाँ जनता उम्मीदों के पानी में डूब रही थी, वहीं सड़क पर असली पानी बहने लगा। अब लोग मज़ाक में कह रहे हैं —
> “सड़क का काम कब पूरा होगा, यह तो विधायक जी और भगवान ही जानते हैं — बस फर्क इतना है कि भगवान जवाब नहीं देते, और विधायक जी अभी बिहार चुनाव में व्यस्त हैं
नतीजा – न सड़क सुधरी, न तस्वीर धुंधली हुई बस अगर पानी फिरा तो यहां से आवागमन करने वाले हजारों नागरिकों के अरमानों पर



