सिंगरौली
फ़र्जी कॉल गिरोह के सभी आरोपी जमानत पर रिहा!
कलेक्टर को "मुख्य सचिव" बनकर कॉल के मामले में थे बंद

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो
सिंगरौली। कलेक्टर गौरव बैनल को फर्जी कॉल करने के मामले में गिरफ्तार किए गए तीनों आरोपियों को आज जिला एवं सत्र न्यायालय में पेश किया गया। जहां विद्वान न्यायाधीश माननीय शिवचरण पटेल की सुनवाई के बाद सभी आरोपियों को ₹25,000–₹25,000 की जमानत पर रिहा कर दिया गया है। तीनों को पूर्व में न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेजा गया था।
अवगत कराते चले कि दिनांक 25 अक्टूबर 2025 की दोपहर, कलेक्टर सिंगरौली गौरव बैनल के सरकारी मोबाइल पर एक कॉल आया। फोन पर आत्मविश्वास भरी आवाज़ गूंजी “मैं मुख्य सचिव, मध्यप्रदेश बोल रहा हूँ… एक जरूरी काम है, तुरंत करवाना है।” लेकिन कलेक्टर बैनल की प्रशासनिक सूझबूझ ने “मुख्य सचिव” के इस नाटकीय कॉल की सच्चाई उजागर कर दी।सत्यापन कराने पर पता चला कि कॉल किसी शीर्ष अधिकारी का नहीं, बल्कि एक फर्जी कॉल गिरोह के मास्टरमाइंड का था।
कलेक्टर की सूचना पर साइबर टीम ने ट्रैकिंग शुरू की और भोपाल से 24 वर्षीय सचिन मिश्रा (कंप्यूटर साइंस ग्रेजुएट) को धर दबोचा था। जांच में पता चला कि सचिन का साथ देने वाले दो अन्य आरोपी भी साजिश में शामिल थे बी.पी. मिश्रा, सचिन्द्र तिवारी, निवासी वैढ़न तीनों के खिलाफ अपराध क्रमांक 1161/2025,धारा 204, 319 (BNS) व 66(D) आईटी एक्ट के तहत मामला दर्ज हुआ।
पुलिस जांच में सामने आया था कि आरोपियों का उद्देश्य
डीएमएफ (District Mineral Foundation) फंड से 93 शालाओं के आंतरिक विद्युतिकरण के नाम पर लगभग ₹4,45,80,000 की स्वीकृति करवाना था।फर्जीवाड़े का जनपदवार ब्योरा भी तैयार किया गया था । ये फर्जी प्रस्ताव “मुख्य सचिव” के नाम पर आदेश दिलवाने की एक सुनियोजित प्रशासनिक ठगी की साजिश थी।
जांच के दौरान पुलिस को एक फर्जी शासकीय पत्र भी मिला था। पत्र क्रमांक – 3814/तक/ग्रा. यां. से./2023, दिनांक 09/12/2024,जिसमें डीएमएफ फंड से तकनीकी प्राक्कलन प्रस्तुत करने का निर्देश लिखा था। इसी पत्र को आधार बनाकर आरोपी कलेक्ट्रेट पहुंचे थे।
आईबी अफसर का नाम आने से मचा था हड़कंप
गिरफ्तार आरोपी बी.पी. मिश्रा के इंटेलिजेंस ब्यूरो (आईबी) में पदस्थ होने की चर्चा ने प्रशासनिक हलकों में सनसनी फैला दी थी। हालांकि पुलिस व प्रशासन ने इस पर आधिकारिक पुष्टि करने से परहेज किया था। एसपी सिंगरौली मनीष खत्री ने बताया था कि“यह एक संगठित गिरोह प्रतीत होता है। जांच में इनके संपर्क और उद्देश्य की गहराई से पड़ताल की जा रही है। जमानत के बाद तीनों आरोपी अब न्यायिक प्रक्रिया के अगले चरण का सामना करेंगे। पुलिस विभाग फर्जीवाड़े के वित्तीय लिंक और डिजिटल साक्ष्यों की जांच में जुटा है।



