गाजियाबाद

प्रसव के दौरान भी वसूली का खेल, गरीब मरीजों को झेलनी पड़ रही हैं दुश्वावारियाँ

दो साल बाद भी सर्जन नहीं, अस्पताल बना केवल नाम का “संयुक्त चिकित्सालय”

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो
लोनी (गाज़ियाबाद)। 50 शैय्या संयुक्त चिकित्सालय, लोनी का भव्य उद्घाटन हुए पूरे दो वर्ष बीत चुके हैं, लेकिन आज तक अस्पताल में सर्जन की नियुक्ति नहीं हो पाई है। नतीजतन, मरीजों को इलाज के लिए निजी अस्पतालों या अन्य सरकारी चिकित्सालयों का रुख करना पड़ रहा है। इससे जहाँ मरीजों को समय की बर्बादी होती है, वहीं आर्थिक बोझ भी उन पर लगातार बढ़ रहा है।
 उद्घाटन के वादे अधूरे — अब भी नहीं मिली बेहतर स्वास्थ्य सुविधा
अस्पताल का उद्घाटन 20 मई 2023 को प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने किया था। उस समय वादा किया गया था कि लोनी क्षेत्र के लोगों को अब बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएँ उनके ही क्षेत्र में मिल सकेंगी।
लेकिन दो वर्ष बाद भी स्थिति इसके बिल्कुल उलट है। अस्पताल के मुख्य द्वार पर अब तक अस्पताल का नाम तक नहीं लिखा गया, जो प्रशासनिक लापरवाही को उजागर करता है।
 चिकित्सकों की भारी कमी
 मरीजों को इलाज के लिए जाना पड़ रहा है बाहर
अस्पताल में इस समय न तो सर्जन, न रेडियोलॉजिस्ट, न ईएनटी विशेषज्ञ, न ही बाल रोग विशेषज्ञ उपलब्ध हैं।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि अस्पताल में केवल सीमित संख्या में डॉक्टर हैं, जो पूरे दिन आने वाले मरीजों की संख्या के मुकाबले बेहद कम संख्या में हैं।
इस वजह से मरीजों को सामान्य बीमारियों से लेकर गंभीर स्थितियों तक के लिए भी दूसरे अस्पतालों का रुख करना पड़ता है।
 पर्ची के नाम पर वसूली,
 ओपीडी में डॉक्टरों की देरी से भी मरीज बेहाल
मरीजों ने बताया कि एक रुपए की पर्ची के बदले कर्मचारी खुले पैसे न होने का बहाना बनाकर पाँच या दस रुपए तक वसूल रहे हैं।
साथ ही, डॉक्टरों के समय पर ओपीडी में न बैठने की शिकायतें भी आम हैं।
कई बार मरीज घंटों लाइन में खड़े रहते हैं, लेकिन डॉक्टरों के न आने के कारण बिना इलाज के वापस लौटना पड़ता है।
 दवा वितरण काउंटरों पर अफरातफरी, स्टॉक खत्म होने से मरीज परेशान
अस्पताल के दवा वितरण काउंटरों पर भारी भीड़ के कारण मरीजों को कई बार आधी-अधूरी दवाइयाँ ही दी जाती हैं।
कई बार स्टॉक खत्म होने से मरीजों को बाहर से महँगी दवाएँ खरीदनी पड़ती हैं, जिससे गरीब तबके के लोग सबसे अधिक प्रभावित होते हैं।
 प्रसव के दौरान वसूली और गंदगी से बढ़ी परेशानी
स्थानीय लोगों ने बताया कि प्रसव के दौरान कर्मचारियों द्वारा रुपए वसूलने की शिकायतें भी आम हैं।
साथ ही, अस्पताल की सफाई व्यवस्था बेहद बदहाल है। मुख्य द्वार के पास पन्नी, गंदगी और कूड़े के ढेर लगे रहते हैं, जिससे बदबू और संक्रमण का खतरा बना हुआ है।
मरीजों और उनके परिजनों को इस गंदगी के बीच घंटों इंतजार करना पड़ता है।
सामाजिक संगठनों की नाराज़गी ‘प्रशासन की उदासीनता से जनता बेहाल’
इस स्थिति पर भारतीय किसान संघ की प्रदेश मंत्री संगीता ठाकुर और आगाज सेवा ट्रस्ट की अध्यक्ष हेमा सिंह ने नाराज़गी जताई।
उन्होंने कहा कि प्रशासन की उदासीनता के कारण मरीजों को मूलभूत स्वास्थ्य सुविधाओं से वंचित रहना पड़ रहा है।
दोनों ने जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग से तत्काल कार्रवाई की माँग की है ताकि चिकित्सकों की नियुक्ति की जा सके और अस्पताल में सफाई एवं व्यवस्था सुधारने के ठोस कदम उठाए जाएँ।
 जनता की उम्मीदें अब भी कायम
हालाँकि सुविधाएँ अब भी अधूरी हैं, लेकिन स्थानीय लोगों को उम्मीद है कि सरकार और प्रशासन जल्द ही इस दिशा में संज्ञान लेंगे।
लोग चाहते हैं कि लोनी संयुक्त चिकित्सालय को एक पूर्ण सुसज्जित अस्पताल के रूप में विकसित किया जाए, ताकि क्षेत्र की जनता को इलाज के लिए दूर-दराज़ भटकना न पड़े।
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