नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो
असम के सुप्रसिद्ध एवं लोकप्रिय संगीतकार जुबिन गर्ग की 19 सितंबर 2025 को सिंगापुर में हुई रहस्यमय मृत्यूसंबंधी मामले में 55 दिन बीत जाने के बावजूद अब तक न्याय की कोई ठोस प्रगति नहीं होने से असम सहित देश-विदेश में एक गहरा आक्रोश व्याप्त है। जुबिन गर्ग के प्रशंसक, सामाजिक संगठन, राजनीतिक दल और आम जनता इस मामले में जांच की धीमी गति, पारदर्शिता की कमी और सरकार की उदासीनता पर तीव्र नाराजगी व्यक्त कर रहे हैं। सिंगापुर पुलिस द्वारा दिए गए मरणोपरांत जांच रिपोर्ट में जुबिन गर्ग का मौत का कारण ‘डूबना’ बताया गया था। हालांकि जांच में अभी भी कई अनसुलझे प्रश्न बने हुए हैं, जिनके जवाब एसआईटी की आगामी रिपोर्ट से मिलने की उम्मीद है। जांच में कई लोगों से पूछताछ की गई है, जिनमें जुबिन के मैनेजर सिद्धार्थ शर्मा , फेस्टिवल आयोजक श्यामकानु महंत , पुलिस अधिकारी और अन्य शामिल हैं। पाँच आरोपियों को कोर्ट ने न्यायिक हिरासत में रखा है, लेकिन जांच परिणाम और न्यायिक कार्रवाई में देरी के कारण जनता में निराशा बढ़ रही है। असम और अन्य इलाकों में जुबिन गर्ग के नाम पर आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रमों के दौरान और सोशल मीडिया पर न्याय की मांग जोर पकड़ रही है। लोग मौन धरना, विरोध प्रदर्शन और ज्ञापन सौंपने जैसे माध्यमों से सरकार पर दबाव बढ़ा रहे हैं। जनता का सवाल है कि यदि जुबिन गर्ग जैसे प्रसिद्ध कलाकार को अब तक न्याय नहीं मिल पाया, तो आम नागरिकों को न्याय कब मिलेगा? यह आशंका और गहरी हो रही है। असम सरकार और पुलिस प्रशासन पर आरोप लग रहे हैं कि वे जांच में राजनैतिक दबाव, देरी और मनमानी कर रहे हैं। मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा शर्मा ने आश्वासन दिया है कि जल्द ही इस मामले का न्यायिक हल निकलेगा, परंतु जनता के मन में इस आश्वासन को लेकर भी संशय बना हुआ है। अंतिम निर्णय तक जांच में पारदर्शिता और तेजी लाने की मांग जोर पकड़ रही है। इस बीच जुबिन गर्ग के परिवार, प्रशंसक और सामाजिक व्यक्तियों का आक्रोश लगातार बढ़ रहा है, जो न्याय की उम्मीद के नाम पर एकजुट होकर सरकार से उचित कदम उठाने की गुहार लगा रहे हैं। यह मामला न केवल एक कलाकार के निधन का मामला है, बल्कि न्याय व्यवस्था की विश्वसनीयता और पारदर्शिता की परीक्षा भी बनता जा रहा है। जनता चाहती है कि आरोपितों को कड़ी सजा मिले और यह सुनिश्चित किया जाए कि इस प्रकार की घटनाएँ भविष्य में न हों। यह मामला वर्तमान में असम के सांस्कृतिक और सामाजिक इतिहास में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर बन चुका है, जो न्याय और पारदर्शिता के सवालों को लेकर व्यापक बहस को जन्म दे रहा है। जल्द न्याय मिलने की उम्मीद के साथ जनता लगातार सरकार पर दबाव बनाए हुए है ताकि जुबिन गर्ग को न्याय मिल सके और उनकी स्मृति सम्मानित रहे।



