झारखंड राज्य 25 साल का हो गया पर विकास की गति में अभी भी है पीछे
Jharkhand is 25 years old but is still lagging behind in the pace of development.
संतोष कुमार दे
नेशनल प्रेस टाइम्स ब्यूरो। झारखंड राज्य अलग हुए 25 साल हो गए 2025 में पूरे झारखंड राज्य में रजत जयंती समारोह के मना रहे हैं झारखंड राज्य ने अपने 25 साल के इतिहास में नक्सलवाद, राजनीतिक अस्थिरता और गरीबी जैसी चुनौतियों का सामना किया है, लेकिन साथ ही खनिज संपदा, खेल प्रतिभाओं और सांस्कृतिक विकास में महत्वपूर्ण प्रगति की है। इस दौरान कई पार्टिया आई और गई झारखंड राज्य की स्थापना 15 नवंबर 2000 को हुई थी, और इस अवधि में बुनियादी ढांचे, जैसे सड़क पानी और बिजली में सुधार हुआ है। 2014 के बाद से राजनीतिक स्थिरता में सुधार हुआ है, लेकिन विकास के कुछ मुद्दे, जैसे स्वास्थ्य, शिक्षा और रोजगार अभी भी अनसुलझे हैं। विकास और बुनियादी ढाँचा: सड़कों और बिजली जैसी बुनियादी सुविधाओं में काफी सुधार हुआ है। रांची, जमशेदपुर और देवघर जैसे शहरों को हवाई मार्ग से जोड़ा गया है।
शिक्षा: एनआईटी जमशेदपुर, आईआईएम रांची और सेंट्रल यूनिवर्सिटी जैसे संस्थानों ने शिक्षा के क्षेत्र में योगदान दिया है।
खेल: महेंद्र सिंह धोनी, दीपिका कुमारी और सलीमा टेटे जैसे खिलाड़ियों ने देश को गौरवान्वित किया है, हालांकि राज्य में खेल नीति अभी भी स्पष्ट नहीं है।
सांस्कृतिक और पर्यटन विकास: जनजातीय कला और संस्कृति को राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय पहचान मिल रही है। पर्यटन स्थलों के विकास से राजस्व और पहचान दोनों में वृद्धि हो रही है।
योजनाएँ: जनता की भलाई के लिए कई योजनाएँ शुरू की गई हैं, जैसे मुख्यमंत्री सुकन्या योजना और सार्वभौमिक पेंशन योजना। मैया सम्मान योजना, युवाओं के लिए भी कई मार्ग
खोले गए हैं लेकिन उद्योग धंधे के क्षेत्र में अभी भी झारखंड राज्य पिछड़ा हुआ है यहां के युवा यूतियों को दूसरे राज्यों में रोजगार के लिए पलायन कर दूसरे राज्य में निर्भर रहना पड़ता उद्योग धंधों का पिछड़ापन होना विकास की गति में अवरोध सिद्ध हुआ है।
चुनौतियाँ और संघर्ष-
१.नक्सलवाद: राज्य ने नक्सलवाद के कारण कई दर्दनाक घटनाओं और जान-माल के नुकसान का सामना किया है।
२..राजनीतिक अस्थिरता: पहले 14 वर्षों में राजनीतिक अस्थिरता ने विकास में बाधा उत्पन्न की, जहाँ 14 सरकारें बनीं और 3 बार राष्ट्रपति शासन लगा।
गरीबी और भ्रष्टाचार: यहां भारी मात्रा में खनिज संपदा होने के बावजूद गरीबी बनी रही, झारखंड राज्य में बिहार राज्य से भी ज्यादा भ्रष्टाचार होने भी झारखंड राज्य को कमजोर किया।
३..अप्रभावी नीतियाँ: कुछ क्षेत्रों में, जैसे भाषा परिषद और खेल नीति के संबंध में नीतियाँ खानापूर्ति के लिए कागजों तक सीमित रही जिससे लोगों का विश्वास टूटता रहा है।
४..विकास में कमी: स्वास्थ्य, शिक्षा और रोजगार जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में काम किया जाना बाकी है और जनता की उम्मीदें अब भी पूरी नहीं हुई हैं। इसके अलाये हल्के सरकार में बहुत सारी योजना आई कई बार राज्य में सरकार आपके द्वार मैं सरकार द्वारा कई योजनाएं आवास योजना बुआ आवास योजना पेंशन योजना एवं कई योजनाएं अधिकारियों द्वारा कागजात लिए गए लेकिन वह भी सिर्फ खानापूर्ति के लिए लिए गए उसमें कहीं भी विकास नहीं देखा गया इसे हम किस प्रकार सरकार की उपलब्धि कर सकते हैं झारखंड में प्रचुर मात्रा में खनिज संप्रदाय होने के बावजूद ना यहां शिक्षा का विकास हुआ ना स्वास्थ्य का और ना ही रोजगार का झारखंड राज्य के कई जिले में ऐसा भी देखा गया है कि अभी भी सड़क मार्ग नहीं होने के कारण बीमार पीड़ित मरीज को खटिया में कई किलोमीटर तक पैदल ले जाने को मजबूर हैं हमारे राज्य में रिम्स बी जी एच एवं अन्य कई अस्पताल हैं जहां गरीबों को लिए बेड पर्याप्त नहीं है और हमारे स्वास्थ्य मंत्री कहते हैं कि रिम्स टू बनाएंगे पहले रिम्स वन को ही गरीब के लिए पर्याप्त करें फिर रिम्स टू की बातें करें तो यह सौबनिया बात होगी फिर हम 25 साल के बाद भी किसी जुबान से कहेंगे कि हमारा झारखंड राज्य विकास की ओर अग्रसर है।



