सिंगरौली
जेपी मझौली -उज्जैनी के कर्मचारियों ने ठप किया काम
9 सूत्रीय मांगों के बिना नहीं थमेगा आंदोलन

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो।
सिंगरौली। जेपी कंपनी के कर्मचारियों ने वर्षों की उपेक्षा और अनदेखी से तंग आकर आखिरकार आज बड़ा कदम उठा ही लिया। कंपनी के मुख्य द्वार पर सैकड़ों कर्मचारी एकजुट होकर डट गए, काम पूरी तरह बंद कर दिया और अपनी 9 सूत्रीय मांगों के समर्थन में तहसीलदार को ज्ञापन सौंपा। चेतावनी साफ है—15 दिन में समाधान नहीं तो कंपनी की घेराबंदी और अनिश्चितकालीन धरना तय है।
मिली जानकारी अनुसार कर्मचारी पिछले 10–15 वर्षों से कंपनी में सेवा दे रहे हैं, लेकिन आज तक आईडी कार्ड तक उपलब्ध नहीं कराया गया। दुर्घटना की स्थिति में पहचान और जिम्मेदारी तय नहीं हो पाती,परिवार लगातार भय में जी रहा है। वेतन भुगतान में भी गंभीर अनियमितताएँ हैं। वर्करों का कहना है कि बार-बार शिकायत के बावजूद प्रबंधन सुनता ही नहीं इसलिए मजबूरन आंदोलन करना पड़ा।
बताया गया है कि कर्मचारियों की 9 सूत्रीय मांगें हैं जो समस्या की असली जड़ हैं। जैसे कि माइंस अधिनियम और सभी सुरक्षा नियमों का पालन होना चाहिए,काम का माहौल सुरक्षित हो क्योंकि यह वर्करों का पहला और बुनियादी अधिकार है। सभी को पेमेंट स्लिप और आईडी कार्ड उपलब्ध हों। पहचान और कार्य स्थिति स्पष्ट रहे। हर वर्कर का बीमा अनिवार्य हो दुर्घटना की स्थिति में परिवार आर्थिक संकट में न फँसे। वेतन विसंगति दूर की जाए। महीने में ढाई छुट्टी लागू हो क्योंकि अत्यधिक कार्यभार से थकान और दुर्घटना का जोखिम बढ़ता है। वार्षिक PLI बोनस अनिवार्य रूप से दिया जाए यह वादा वर्षों से अधूरा है। साप्ताहिक अवकाश एक दिन अनिवार्य हो ,कर्मचारी का यह सबसे बुनियादी अधिकार है। निष्कासित वर्करों को पुनः बहाल किया जाय। स्थानीय युवाओं का हक सुनिश्चित हो।
अचानक हड़ताल से कंपनी प्रबंधन और प्रशासन दोनों सकते में हैं। क्षेत्र के लोगों में चिंता है कि अगर काम ठप रहा तो उत्पादन, परिवहन और स्थानीय रोजगार सभी प्रभावित होंगे। कंपनी के कर्मचारी उम्मीद कर रहे हैं कि प्रशासन हस्तक्षेप करे और समाधान की दिशा में कदम बढ़ाए।
कर्मचारियों की दो-टूक चेतावनी
ज्ञापन देते समय कर्मचारियों ने साफ कहा है कि यदि 15 दिन में समाधान नही निकला तो कंपनी की पूर्ण घेराबंदी और अनिश्चितकालीन धरना हमारा अगला कदम होगा। जिम्मेदार कंपनी प्रबंधन होगा।
अब निगाहें प्रबंधन पर समाधान या टकराव?
ये मांगें न नई हैं, न असंगत सुरक्षा, वेतन और सम्मान जैसे बुनियादी अधिकारों से जुड़ी हैं।अब सवाल यह है कि क्या प्रबंधन कर्मचारियों को राहत देगा? या फिर यह संघर्ष और भड़ककर बड़ा रूप लेगा? सिंगरौली की औद्योगिक गतिविधियों के बीच यह आंदोलन आने वाले दिनों में बड़ा असर डाल सकता है।



