बरेली
सत्य सनातन धर्म की रक्षा के लिए व्यासपीठ भी सत्य नहीं बोलेगी तो कौन बोलेगा :परम पूज्य देवी हेमलता शास्त्री

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो
बरेली : थाना इज्जतनगर क्षेत्र के खंडेलवाल कॉलेज में चल रही कथा में देवी ने कहा की समय बहुत लोग तीर्थ में पर्यटन या रील बनाने की भावना से जाते हैं, परंतु यह स्थान दिखावे या मनोरंजन के लिए नहीं, बल्कि आत्मा के उत्थान और भक्ति के लिए होते हैं। जब हम श्रद्धा और भाव से तीर्थ जाते हैं, तब वहाँ का हर कण हमें पवित्र कर देता है। रास केवल एक लीला नहीं थी, वह प्रेम की पराकाष्ठा थी जहां भगवान ने दिखाया कि सच्चा प्रेम स्वार्थ रहित होता है। जब गोपियों ने अपना सब कुछ भगवान को समर्पित कर दिया, तब भगवान ने उनके हृदय में स्वयं को प्रकट किया। यह रास, भक्ति और प्रेम का दिव्य मिलन था जहाँ न शरीर था, न अहंकार, केवल आत्मा और भगवान का संगम था। मनुष्य को जिस चीज़ का अभिमान होता है चाहे वह धन का हो, रूप का हो, ज्ञान का हो या पद का भगवान उसी का अहंकार तोड़ देते हैं। क्योंकि जब तक अहंकार है, तब तक भक्ति का बीज हृदय में अंकुरित नहीं हो सकता। आज हम अपने बच्चों की रक्षा इसलिए नहीं कर पा रहे हैं, क्योंकि हम स्वयं धर्म से जुड़ाव खो चुके हैं। जब माता-पिता के जीवन में भक्ति, पूजा, कथा और सत्संग का स्थान नहीं होता, तो बच्चे भी उसी दिशा में बढ़ते हैं जहाँ केवल भौतिकता और दिखावा होता है। धर्म से अटैचमेंट ही वह सुरक्षा कवच है, जो परिवार को टूटने से, और समाज को पतन से बचाता है। अच्छा कार्य करते समय कभी यह न सोचें कि लोग क्या कहेंगे। समाज की परवाह करते-करते हम अपने कर्तव्यों और धर्म से दूर हो जाते हैं। भगवान केवल कर्म देखते हैं, दिखावा नहीं। इसलिए जीवन में हमें सच्चाई और सेवा भाव से कार्य करते रहना चाहिए। आज की शिक्षा प्रणाली केवल बच्चों को नौकरी के योग्य बना रही है, लेकिन उन्हें संस्कार नहीं सिखा रही। हमारे बच्चों के पास डिग्रियां हैं, लेकिन जीवन के मूल्य और नैतिकता की समझ नहीं। हमें अपनी संतान को यह समझाना चाहिए कि वे विधर्मियों से सावधान रहें, किसी के बहकावे में न आएं और सदा अपने धर्म, अपनी संस्कृति तथा अपने आदर्शों के प्रति दृढ़ रहें। धर्म से ही जीवन की दिशा बनती है और भक्ति से ही उसका उद्देश्य पूर्ण होता है। गिरधर गोपाल डॉ विनय खंडेलवाल श्रद्धा खंडेलवाल अशोक गोयल अशोक गुप्ता सहित तमाम भक्तगण मौजूद रहे।



