मुरादाबाद

नहीं रुक रहा नगर निगम में टैंडर मेनेज कराने का खेल नगर आयुक्त महापौर व चीफ इंजीनियर की मिलीभगत से सरकार को लगाया जा रहा करोड़ों रुपए का चूना

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो
मुरादाबाद। मुरादाबाद नगर निगम ई टैंडरिंग को लेकर इन दिनों सुर्खियों में बना हुआ है सूत्रों के हवाले से खबर मिली है कि आॅन लाइन टैंडर होने के बावजूद भी नगर आयुक्त और चीफ इंजीनियर अपनी मनमानी करके अनुचित लाभ के कारण काफी समय से टैंडर मेनेज करा रहे हैं जो टैंडर कभी 25 -30 पर्सेंट ब्लो जाते थे वो आज शासन को करोड़ों रुपए का नुक़सान पहुंचाते हुए अपने चंद चेहते ठेकेदारों के बीच में मेनेज कराये जा रहें हैं सूत्र बताते है कि एक ठेकेदार की टैंडर मेनेज कराने को लेकर नगर आयुक्त और महापौर से सेटिंग है जो टैंडर मेनेज कराने के नाम पर बड़े साहब के लिए ठेकेदारों से 10 पर्सेंट अतिरिक्त अनुचित लाभ के नाम पर इकट्ठा करके पहुंचाता है फिर होता है टैंडर मेनेज का खेल शुरू जानकारी मिली है कि उस ठेकेदार का यह भी कहना है कि जिसे हम चाहेंगे वो ही टैंडर डालेगा और हकीकत में हो भी यही रहा है नाम न बताने की शर्त पर कुछ ठेकेदारों का कहना है कि 40-50 चेहते ठेकेदारों के अलावा कोई ठेकेदार टैंडर नहीं डाल पा रहा है और अगर दो चार ठेकेदार टैंडर 5 -10 पर्सेंट ब्लो डाल भी देते हैं तो उनके टैंडर निरस्त कर दिए जाते हैं जबकि शासनादेश है कि जिसका टैंडर ज्यादा ब्लो होगा उसका ही मंजूर किया जायेगा परन्तु यहां उल्टा हो रहा है बड़ी चालाकी से तीन तीन ठेकेदारों के सेट डलवाकर 15-20-25 पैसे डलवाकर 25 पैसे ब्लो वाले का मंजूर कर लिया जाता है जो कि एस्टीमेट रेट के बराबर ही हुआ जिससे शासन को हर लिस्ट पर करोड़ों रुपए की हानि हो रही है जानकारी यह भी मिली है कि कुछ माह पूर्व मुरादाबाद नगर निगम में सात सात साल से जमे जेई, एई के स्थानांतरण भी हो चुके हैं परंतु नगर आयुक्त ने उन्हें अभी तक रिलीव नहीं किया हैं और वर्तमान में नगर निगम में अधिशासी अभियंता की कुर्सी भी खाली है उनकी गैर मौजूदगी में सहायक अभियंता ही उनके हिस्से का लाभ ले रहे हैं कुछ माह पूर्व चीफ इंजीनियर दिनेश सचान का स्थानांतरण होने के बाद उनकी जगह प्रधानमंत्री के संसदीय क्षेत्र वाले बनारस से दूसरे चीफ इंजीनियर आये हैं जिन्होंने आते ही अपना पूरा हक अदा करते हुए सारे मामले पर चुप्पी साध ली है।
चीफ इंजीनियर मुरादाबाद नगर निगम
चीफ इंजीनियर मुरादाबाद नगर निगम से जब प्रकरण के विषय में जानकारी लेनी चाही तो पहले तो उन्होंने सीयूजी नं नहीं उठाया और फिर बाद में सारी बात पर चुप्पी साधते हुए कन्नी काट ली। इस बात से यह प्रतीत होता है कि हकीकत में नगर निगम में इन कारनामों को अंजाम दिया जा रहा है।
मेयर मुरादाबाद
अपनी मिठास के धनी मेयर मुरादाबाद विनोद अग्रवाल से पूछने पर जबाव मिला कि मुझे टैंडर मेनेज होने की जानकारी नहीं है यदि ऐसा हो रहा है तो गलत हो रहा है इससे तो वास्तव में शासन को नुकसान हो रहा है मैं नगर आयुक्त और चीफ इंजीनियर से बात करूंगा अब देखना है कि शासनादेश की धज्जियां उड़ाते हुए टैंडर मेनेज का ये खेल बंद होगा या फिर यूं ही खजाना लूटता रहेगा।
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