गाजियाबाद

राम मंदिर के मुख्य शिखर पर लहराती धर्म ध्वजा सदियों के संघर्ष और बलिदान का प्रतीक : जय भगवान गोयल

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो

लोनी दिल्ली : अयोध्या में 25 नवम्बर 2025 को श्री राम मंदिर के मुख्य शिखर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा भगवा ध्वज फहराए जाने के ऐतिहासिक क्षण को देश-दुनिया के करोड़ों सनातनी असाधारण गर्व और भावनाओं के साथ देख रहे थे। यह अवसर विवाह पंचमी, वृंदावन बांके बिहारी जी प्रकटोत्सव और श्री गुरु तेग बहादुर के बलिदान दिवस के दिन आयोजित होना सनातन संस्कृति के लिए शुभ प्रतीक माना जा रहा है।
यूनाइटेड हिंदू फ्रंट के अंतर्राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष और राष्ट्रवादी शिवसेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष जय भगवान गोयल ने इस ऐतिहासिक पल को ‘‘सनातन इतिहास के स्वर्ण युग की शुरुआत’’ बताया। उन्होंने कहा कि यह दृश्य देखते हुए 1990 के कारसेवक आंदोलन, 6 दिसंबर 1992 की घटनाएं और श्री राम मंदिर आंदोलन के पुरोधाओं—श्री रामचंद्र परमहंस, अशोक सिंघल, विष्णु हरि डालमिया, महंत अवैद्यनाथ और बालासाहेब ठाकरे सहित लाखों कार्यकर्ताओं के बलिदान और संघर्ष की यादें ताज़ा हो गईं।
गोयल ने कहा कि बाबरी ढांचा विवाद में अभियुक्त बनाए जाने, जेल जाने और 28 वर्षों तक अदालतों के चक्कर काटने का उन्हें कोई मलाल नहीं है, बल्कि गर्व है कि उन्हें यह सेवा करने का अवसर प्राप्त हुआ।
उन्होंने कहा कि 9 नवंबर 2019 को सुप्रीम कोर्ट का फैसला, 5 अगस्त 2020 को शिलान्यास, 22 जनवरी 2024 को प्राण-प्रतिष्ठा और अब ध्वजारोहण—ये सभी घटनाएं संकेत हैं कि जल्द ही सनातन का संदेश ‘‘वसुधैव कुटुंबकम्’’ विश्व में स्थापित होगा।
उन्होंने आरोप लगाया कि स्वतंत्रता के बाद अधिकांश राजनीतिक दलों ने हिंदू समाज के सम्मान और ऐतिहासिक प्रतीकों को पुनर्स्थापित करने की दिशा में गंभीरता नहीं दिखाई। जबकि दुनिया के कई देशों में विदेशी शासन के प्रतीक हटाए गए।
गोयल ने कहा कि वर्ष 2014 के बाद केंद्र सरकार ने राम मंदिर मामले में न्यायिक प्रक्रिया को गति दी और सभी पक्षकारों को बराबर अवसर देकर न्यायपूर्ण निर्णय का मार्ग प्रशस्त किया।
उन्होंने नालंदा विश्वविद्यालय, सोमनाथ मंदिर और भारतीय शिक्षा प्रणाली पर ऐतिहासिक आक्रमणों का उल्लेख करते हुए कहा कि नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 भारतीय ज्ञान परंपरा को पुनर्जीवित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
गोयल ने कहा कि श्री राम मंदिर के दर्शन के लिए अब तक 45 करोड़ श्रद्धालु अयोध्या आ चुके हैं, जो विश्व रिकॉर्ड है। उन्होंने कहा कि विश्व में बढ़ते सनातन वैभव से देश-विरोधी और धर्म-विरोधी शक्तियां विचलित हैं और समय-समय पर देश की एकता को तोड़ने की साजिशें कर रही हैं, परंतु भारत दृढ़ और सुरक्षित है।
अंत में उन्होंने सभी सनातनियों से आह्वान किया कि वे एकजुट होकर सरकार का सहयोग करें ताकि काशी विश्वनाथ और श्री कृष्ण जन्मभूमि (मथुरा) के मंदिरों का भव्य स्वरूप भी साकार हो सके और आने वाली पीढ़ियां ‘‘विकसित, सुरक्षित और विश्वगुरु भारत’’ का अनुभव कर सकें।
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