असम

असम के गुवाहाटी में डॉ. भारत चन्द्र कलिता और लीला कलिता स्मारक पाँचवाँ वार्षिक व्याख्यान कार्यक्रम आयोजित। 

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो

असम : भारतीय इतिहास संकलन समिति, असम के तत्वावधान में शनिवार को असम के गुवाहाटी स्थित आलोक भवन के मधुकर लिमये सभागृह में प्रख्यात इतिहासकार डॉ. भारत चन्द्र कलिता एवं लीला कलिता स्मारक पाँचवाँ वार्षिक व्याख्यान आयोजित किया गया। इस वर्ष के व्याख्यान का विषय था— “भारतीय ज्ञान परंपरा”। दीप प्रज्वलन, पुष्पांजलि और डॉ. कंकना गोस्वामी द्वारा गणेश वंदना तथा अखिल भारतीय इतिहास संकलन योजना के राष्ट्रीय सह-सचिव हेमंत धिंग मजूमदार के स्वागत भाषण के साथ कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ। मुख्य वक्ता के रूप में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के असम क्षेत्र प्रचारक वशिष्ठ बुजरबरुआ ने एक सारगर्भित व्याख्यान प्रस्तुत किया। अपने संबोधन में वशिष्ठ बुजरबरुआ ने भारतीय ज्ञान परंपरा पर प्रकाश डालते हुए कहा कि भारतीय दर्शन के अनुसार यह संपूर्ण विश्व एक परिवार है। इसी कारण भारतीय लोग केवल अपने लिए ही नहीं, बल्कि सम्पूर्ण जगत के कल्याण की कामना करते हैं। उन्होंने कहा कि मत और उपासना पद्धति भिन्न हो सकती है, परंतु भारतीय दर्शन सभी को साथ मिलकर जीवन यापन करने की शिक्षा देता है। उन्होंने आगे कहा कि भारतीय वेद विज्ञान-विरोधी नहीं हैं; वेद के प्रत्येक श्लोक में वैज्ञानिक सूत्र निहित हैं। भारतीय कालगणना पद्धति अत्यंत वैज्ञानिक है, जो समय की सटीक गणना करती है और आज का आधुनिक विज्ञान भी उस स्तर तक नहीं पहुँच सका है। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि विदेशी आक्रमणों से पहले भारत आर्थिक दृष्टि से विश्वगुरु था तथा शिक्षा के क्षेत्र में भी अत्यंत उन्नत था। इसी कारण से विश्व के अनेक देशों के छात्र गुरु‍कुलों एवं भारतीय विश्वविद्यालयों में शिक्षा प्राप्त करने आते थे। भारतीय संस्कृति लूट या अत्याचार का नहीं, बल्कि ज्ञान और लोककल्याण का संदेश देती है।कार्यक्रम की अध्यक्षता भारतीय इतिहास संकलन समिति, असम के अध्यक्ष डॉ. गजेन्द्र अधिकारी ने की। अपने अध्यक्षीय भाषण में उन्होंने राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (NDA) में लाचित बरफुकन पुरस्कार आरंभ किए जाने के लिए डॉ. भारत चन्द्र कलिता के प्रयासों का भी उल्लेख किया।अखिल भारतीय इतिहास संकलन समिति के राष्ट्रीय महासचिव हेमंत धिं मजूमदार ने अपने संबोधन में भारतीय इतिहास संकलन समिति, असम के दो कार्यकालों तक अध्यक्ष रहने के दौरान डॉ. कलिता के योगदान को स्मरण किया और कहा कि समिति को वर्तमान स्वरूप देने में डॉ. कलिता का योगदान अविस्मरणीय है। असम के विभिन्न क्षेत्रों से आए लगभग एक सौ से अधिक विशिष्ट व्यक्तियों की उपस्थिति में आयोजित इस कार्यक्रम का संयोजन समिति के पदाधिकारी प्रांजल दास और हेमा शर्मा ने संयुक्त रूप से किया। कार्यक्रम का समापन डॉ. भारत चन्द्र कलिता की ज्येष्ठ पुत्री एवं चिकित्सक डॉ. जुरी भारत कलिता द्वारा धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ।

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