
जनपद में गो अस्पताल ना होने से निराश्रित पशुओं के इलाज में लापरवाही
नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो।
लोनी गाजियाबाद : दिल्ली–शामली रेल लाइन पर लोनी रेलवे स्टेशन के निकट एक दर्दनाक घटना सामने आई है। सुबह करीब 7 बजे सूचना मिली कि ट्रेन की चपेट में आने से एक गोमाता गंभीर रूप से घायल हो गई। सूचना मिलते ही अखिल भारतीय गो रक्षा महासंघ की टीम मौके पर पहुंची। तत्काल हरियाणा के झज्जर से एंबुलेंस मंगाकर गोमाता को उपचार के लिए अस्पताल भेजा गया।
मौके पर अखिल भारतीय गो रक्षा महासंघ के जिला अध्यक्ष परवेज़ चौधरी, जिला उपाध्यक्ष इज़राइल मोहम्मद, जिला महामंत्री रजनीश गुप्ता, भाजपा नेता शिवम, रवि धामा, चेतन पंडित (हिंदू रक्षा दल) सहित अन्य सामाजिक कार्यकर्ता सूचना मिलते ही मौके पर पहुंचे। सभी ने मिलकर गोमाता को उपचार दिलाने का प्रयास किया।
गौरक्षकों ने आरोप लगाया कि गाजियाबाद और ग्रेटर नोएडा में गोवंश के इलाज के लिए कोई बड़ा और समुचित गो अस्पताल नहीं है। ऐसी स्थिति में घायल गोवंश को गाजियाबाद से हरियाणा के झज्जर या दिल्ली भेजना पड़ता है, जिससे समय पर इलाज नहीं मिल पाता।
स्थानीय कॉलोनीवासियों ने बताया कि लोनी और ग्रेटर नोएडा क्षेत्र में बड़ी संख्या में निराश्रित गायें सड़कों पर घूम रही हैं। उनके रखरखाव की कोई ठोस व्यवस्था नहीं है, जिस कारण वे कूड़ा-कचरा खाकर जीवन यापन करने को मजबूर हैं। यह स्थिति न केवल गोवंश के लिए बल्कि आम जनता के लिए भी गंभीर समस्या बन चुकी है।
अखिल भारतीय गो रक्षा महासंघ के जिला अध्यक्ष परवेज़ चौधरी ने बताया कि जैसे-जैसे सर्दी बढ़ेगी, वैसे-वैसे गोमाताओं की मृत्यु संख्या में भी इजाफा होगा। उन्होंने लोनी के प्रशासनिक अधिकारियों से अपील की कि गोमाता की सुरक्षा के लिए तुरंत ठोस कदम उठाए जाएं।
उन्होंने यह भी मांग की कि गौशालाओं में एक गाय के चारे के लिए दी जाने वाली अनुदान राशि 50 रुपये से बढ़ाकर 100 रुपये की जाए, ताकि गोवंश को कूड़ा-कचरा खाने के लिए मजबूर न होना पड़े। साथ ही एक विशेष प्रशासनिक टीम का गठन किया जाए, जो समय-समय पर गौशालाओं का निरीक्षण कर यह सुनिश्चित करे कि शासन द्वारा की गई व्यवस्थाएं सही ढंग से लागू हो रही हैं। यदि कहीं लापरवाही पाई जाए तो दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।
गौरतलब है कि जनपद में पशुओं के इलाज के लिए कोई बड़ा अस्पताल नहीं है। प्रतिदिन नालों में गिरने, सड़क हादसों और रेल दुर्घटनाओं में निराश्रित पशुओं के घायल होने या मरने की खबरें सामने आती रहती हैं। इसके बावजूद प्रशासन की ओर से कोई ठोस और स्थायी समाधान नहीं निकल पाया है, जिससे पशु प्रेमियों और सामाजिक संगठनों में भारी रोष है



