बिहार में आयोजित मगध साहित्य प्रेरणा उत्सव -2025 में असम के हिंदी सेवी संतोष कुमार महतो को रामरतन प्रसाद सिंह “रत्नाकर “स्मृति सम्मान से पुरस्कृत
रत्नाकर स्मृति सम्मान लेकर विदा हुए देश विदेश की साहित्यकार

विश्वनाथ : बिहार के कौआकोल प्रखण्ड के सोखोदेवरा गांव में अवस्थित ऐतिहासिक लोकनायक जयप्रकाश नारायण आश्रम परिसर के राजेन्द्र भवन में तीन दिवसीय साहित्य समागम मगलवार को संपन्न हो गया। अशोक स्मृति संस्थान हिसुआ,नवादा के सौजन्य में आयोजित मगध साहित्य प्रेरणा उत्सव में पहुंचे देश-विदेश के साहित्यकारों को आश्रम के प्रधानमंत्री अरविंद कुमार के द्वारा आश्रम में तैयार किए गए उन्नत किस्म के फल और फूलों के पौधा देकर विदा किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत 28 दिसंबर को की गई थी। लेकिन देश विदेश से कार्यक्रम में पहुंचे साहित्यकारों का जिले के वरिष्ठ साहित्यकार दिगंबत रामरतन प्रसाद सिंह “रत्नाकर ” स्मृति सम्मान से हसुआ के विधायक अनिल सिंह के करकमलों से 29 दिसंबर को सम्मानित किया गया। युवा कवि ओंकार शर्मा कश्यप के संयोजन और संचालन समिति अध्यक्ष देवेंद्र विश्वकर्मा के निर्देशन में आयोजित कार्यक्रम का उद्घाटन हिसुआ के विधायक अनिल सिंह,गोविंदपुर विधानसभा के निवर्तमान विधायक मोहम्मद कामरान,हिलसा के पूर्व विधायक डॉ० उषा सिन्हा,ग्राम निर्माण मण्डल के प्रधानमंत्री अविन्द कुमार, शिक्षाविद डॉ० आरपी साहू,डॉ० शशिभूषण प्रसाद,साहित्यकार नरेंद्र सिंह,वीणा मिश्रा आदि ने संयुक्त रूप से द्वीप प्रज्वलित कर किया। इस अवसर पर देश एवं विदेश के विभिन्न हिस्सों से आये 71 कवियों एवं साहित्यकारों को साहित्यकार रामरतन प्रसाद सिंह रत्नाकर स्मृति सम्मान से सम्मानित किया गया। जिसमें पवित्र भूमि में आयोजित मगध साहित्य प्रेरणा उत्सव -2025 में हिंदी साहित्य के संरक्षण और संवर्धन में उत्कृष्ट योगदान के लिए असम विश्वनाथ जिले के निवासी हिंदी सेवी, कवि तथा शिक्षक संतोष कुमार महतो को हिंदी के वरिष्ठ साहित्यकार रामरतन प्रसाद सिंह “रत्नाकर “स्मृति सम्मान तथा धनराशि से पुरस्कृत किया गया है। इस अवसर पर पटना से लघु कथाकार और संपादक विभा रानी श्रीवास्तव, पूर्व विधायक और साहित्यकार डॉ उषा सिंहा, डॉ. मीना कुमारी परिहार, शोध आधारित लेखन के प्रतिष्ठित साहित्यकार सूर्यगढ़ा के डॉ विजय विनीत, जापान के टोक्यो से आई हाइकु विधा की मर्मज्ञ साहित्यकार कंचन अपराजिता , मध्य प्रदेश के कटनी के अनिल कुमार मिश्र, डॉ कुशकेत सिंह परिहार,ठाकुर सुभाष सिंह,राकेश कुमार उरमलिया, मध्य प्रदेश के रिटायर्ड चीफ इंजीनियर और वरिष्ठ साहित्यकार डॉ विनोद शुक्ल, चॅंदिया (उमरिया) मध्य प्रदेश के करकेली के आशीष तोमर , गुजरात के डॉ हंसा सिद्धपुरा, मुजफ्फरपुर की साहित्यकार डॉ शैल केजरीवाल, मुंगेर विश्वविद्यालय के डॉ वसीम रज़ा, बांका कॉलेज के डॉ पुलकित मंडल, भागलपुर की डॉ रश्मि किरण, डॉ अनुपम कुमारी, प्रयाग राज की अर्पणा आर्या ध्रुव, समर बहादुर सरोज, आशा रघुदेव, प्रयागराज की प्रवीणा आर्या, कौशल किशोर, वैशाली के कवि डॉ प्रीतम कुमार झा, .मीरा प्रकाश,तनुजा सिन्हा , रांची की अंशिता सिन्हा, पटना की कथाकार प्रेमलता सिंह राजपूत, डॉ. सुधा सिन्हा ,नीता सहाय, कवयित्री नूतन सिन्हा,मुजफ्फरपुर की मुस्कान केशरी , सुमन लता अनमोल कुमारी, शंकर शौर्य ,कंचन पाठक सहित दर्जनों स्थानीय साहित्यकार को सम्मानित किया गया।रत्नाकर जी द्वारा शुरू किए गए कार्यों को पूरा करने का आह्वान कार्यक्रम में पहुंचे साहित्यकारों सहित नवादा के साहित्यकार राजेश मझेकर, नरेंद्र सिंह एवं ओमकार कश्यप ने स्वर्गीय रत्नाकर द्वारा शुरू किए गए कार्यों को पूरा करने का आह्वान किया। कहा कि रत्नाकर जी जीवन के अंतिम क्षण तक समाज के बेहतरी के लिए लेखनी के माध्यम से काम करते रहे। पत्रकारिता साहित्य और इतिहास की जानकारी रखने वाले रत्नाकर जी सिर्फ सामान्य कहानी कविता और आलेख नहीं लिखते थे। उन्होंने नवादा सहित पूरे मगध के ऐतिहासिक, पुरातात्विक, धार्मिक स्थलों को अपनी लेखनी में जगह दी। जिसके कारण नवादा में महत्वपूर्ण पर्यटक स्थल ककोलत, सीतामढ़ी, पार्वती, अपसढ सहित राजगीर, बोधगया,नालंदा में स्थित कई महत्वपूर्ण स्थानो पर प्रकाश डाला था। परिणाम स्वरुप सरकार का ध्यान उस ओर गया। इसी प्रकार समाज में व्याप्त कुरीतियों, सामाजिक परंपरा, संस्कृति आदि महत्वपूर्ण विषयों पर प्रकाश डालते हुए दो दर्जन से अधिक हिंदी मगही के पुस्तकों की रचना की है जो हम लोगों को आगे भी प्रेरणा देती रहेगी। साहित्यकारों को संबोधित करते हुए आश्रम के प्रधानमंत्री अरविंद कुमार ने जेपी द्वारा जनकल्याण के लिए शुरू किए गए आश्रम की कहानी बताई। बताया कि शुरुआत के समय में इस इलाके में आम लोगों का प्रवेश निषेध था।



