ललितपुर
कार्यशाला के प्रतिभागियों ने जानी भारतीय स्थापत्य कला की विशिष्टता
21 दिवसीय प्राकृत भाषा कार्यशाला अंतर्गत सात राज्यों के प्रतिभागी हुए शैक्षणिक भ्रमण में शामिल
नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो l
ललितपुर। केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय नई दिल्ली एवं प्राकृत भाषा विकास फाउण्डेशन के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित 21 दिवसीय प्राकृत भाषा अध्ययन कार्यशाला के अंतर्गत शैक्षणिक भ्रमण अत्यन्त सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। यह शैक्षणिक यात्रा सिद्धक्षेत्र नैनागिरि से प्रारम्भ होकर श्रीनेमगिरि, पजनारी, ऐतिहासिक एवं पुरातात्विक नगरी धामोनी, ऐतिहासिक व पुरा वैभव संपन्न मदनपुर एवं विंध्यगिरि की सुरम्य पर्वतमालाओं एवं धसान नदी के पावन तट स्थित अतिशय गिरार जी तथा अवार माता तक सम्पन्न हुई। भ्रमण का मुख्य उद्देश्य प्रतिभागियों को प्राकृत भाषा की जीवंत परम्परा, भारतीय स्थापत्य कला की विशिष्टता, धार्मिक आस्था के केंद्रों तथा सांस्कृतिक-पुरातात्विक धरोहरों से प्रत्यक्ष रूप में परिचित कराना रहा। भ्रमण के दौरान प्रत्येक स्थल पर उसके ऐतिहासिक, भाषिक एवं सांस्कृतिक महत्व पर विद्वानों द्वारा सारगर्भित व्याख्यान प्रस्तुत किए गए, जिससे प्रतिभागियों का बौद्धिक क्षितिज विस्तृत हुआ। दल का कुशल मार्गदर्शन प्रो.कमलेश जैन, डा.धर्मेन्द्र जैन, डा.प्रभात कुमार दास ने किया। संयोजक डा.आशीष आचार्य के संयोजन एवं नेतृत्व में यह शैक्षणिक यात्रा अत्यन्त अनुशासित, ज्ञानवर्धक एवं प्रेरणादायी सिद्ध हुई। इस भ्रमण ने प्रतिभागियों में प्राकृत भाषा एवं भारतीय ज्ञान परम्परा के प्रति नई चेतना, उत्साह और शोधाभिमुख दृष्टि का सशक्त संचार किया। मीडिया प्रभारी डा.सुनील संचय ने बताया कि मप्र, राजस्थान, महाराष्ट्र, दिल्ली, बिहार, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल कुल 7 राज्यों के प्रतिभागी इस कार्यशाला में सम्मिलित हो रहे हैं। प्रतिभागी शैक्षणिक भ्रमण के दौरान बुंदेलखंड के पुरा वैभव और सांस्कृतिक विरासत से रूबरू हुए। प्रतिभागियों और शिक्षकों ने मदनपुर के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहर का अवलोकन किया जो अपने प्राचीन मंदिरों, मध्य कालीन मदन सागर तालाब और जैन कला के लिए प्रसिद्ध है, यहां 12वीं सदी की छत पर बनी अनूठी पेंटिंग और शिलालेख हैं, जो इसे पर्यटकों और इतिहास प्रेमियों के लिए एक खास जगह बनाते हैं।