लोहिया नगर में सीवर उफान पर, गंदे पानी से सड़क बनी नाला
मेड़ा अधिकारियों की लापरवाही से जनता बेहाल, बच्चों की सेहत पर खतरा

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो
मेरठ। लोहिया नगर एल ब्लॉक स्थित सत्यकाम इंटरनेशनल स्कूल के समीप मुख्य सड़क पर सीवर और नालियों की समुचित निकासी न होने से हालात बद से बदतर हो गए हैं। गंदा पानी सड़क पर फैलकर लगभग आधा किलोमीटर तक बह रहा है, जिससे पूरा इलाका जलभराव, दुर्गंध और संक्रमण की चपेट में आ गया है। स्थिति इतनी गंभीर हो चुकी है कि राहगीरों के साथ-साथ स्थानीय निवासियों का सामान्य जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया है।
स्थानीय लोगों के अनुसार, पिछले एक सप्ताह से यह समस्या बनी हुई है, लेकिन मेरठ विकास प्राधिकरण (मेड़ा) के अधिकारी आंखें मूंदे बैठे हैं। नालियों का गंदा पानी सड़क पर बहने से आवागमन लगभग ठप हो गया है। दुर्गंध के कारण क्षेत्र में रहना दूभर हो गया है, वहीं बीमारी फैलने का खतरा भी लगातार बढ़ता जा रहा है।
सबसे अधिक परेशानी सत्यकाम इंटरनेशनल स्कूल आने-जाने वाले बच्चों को उठानी पड़ रही है। स्कूली बच्चे गंदे पानी और फिसलन भरी सड़क से बचते हुए स्कूल पहुंचने को मजबूर हैं। इससे न केवल बच्चों की सुरक्षा पर सवाल खड़े हो रहे हैं, बल्कि अभिभावकों की चिंता भी बढ़ गई है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि बदबू और जलभराव के कारण घर से बाहर निकलना तक मुश्किल हो गया है।
क्षेत्रवासियों ने बताया कि इस संबंध में सहायक अभियंता मेरठ विकास प्राधिकरण मनीष तिवारी को पिछले चार दिनों से लगातार सूचना दी जा रही है, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। वहीं, जूनियर इंजीनियर नरेंद्र कुमार मारकंडे को भी एक सप्ताह से लगातार समस्या से अवगत कराया जा रहा है, बावजूद इसके हालात जस के तस बने हुए हैं। लोहिया नगर के सुपरवाइजर टीटू कौशल मौके पर आकर स्थिति देखकर लौट जाते हैं, लेकिन कोई ठोस और प्रभावी कदम नहीं उठाया गया।
स्थानीय निवासी अकबर अब्बासी का कहना है कि मेरठ विकास प्राधिकरण के अधिकारियों से मिलकर समाधान का प्रयास किया जा रहा है, लेकिन सवाल यह है कि आखिर प्रशासनिक लापरवाही के चलते जनता को इस गंदगी और नारकीय हालात में क्यों रहना पड़ रहा है।
लोगों का आरोप है कि बार-बार शिकायतों के बावजूद प्रशासन कुंभकर्णी नींद में सोया हुआ है, जिससे जनता में भारी आक्रोश है। क्षेत्रवासियों ने चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र समस्या का स्थायी समाधान नहीं किया गया तो आंदोलन का रास्ता अपनाया जाएगा।
क्षेत्र के लोगों ने मेड़ा प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप कर सीवर और नालियों की सफाई कराने, जलभराव की समस्या का स्थायी समाधान सुनिश्चित करने और दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है, ताकि आम जनता को राहत मिल सके और स्कूली बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।


